भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा मौसीबाड़ी से पहुंचे अपने धाम
रांची, 25 जुलाई (हि.स.)। ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में शनिवार को भगवान श्रीजगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मौसीबाड़ी से शनिवार को अपने धाम पहुंचे
इसी के साथ ही रथ यात्रा महोत्सव का समापन बेहद श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ।
नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में प्रवास के बाद तीनों विग्रहों को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुनः मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कराया गया। इस अवसर पर मुख्य पुजारी रामेश्वर पाढ़ी और शुद्धांशु नाथ सहदेव ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। पूजा के बाद भगवान को रथ पर विराजमान कराया गया। जय जगन्नाथ के जयघोष के नारे लगाए गए।
श्रद्धालुओं ने रथ को खींचते हुए भगवान को उनके धाम जगन्नाथपुर मंदिर तक पहुंचाया।
इधर, घुरती रथ मेला को लेकर जगन्नाथपुर मंदिर और मौसीबाड़ी परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और राज्य में शांति एवं खुशहाली की कामना की।
सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई थी। पुजारियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना, आरती और विशेष अनुष्ठान संपन्न कराए। निर्धारित शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा को रथ से उतारकर मंदिर के गर्भगृह में पुनः विराजमान किया गया। जैसे ही भगवान अपने धाम पहुंचे, पूरा मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के जयघोष, शंखध्वनि, घंटों और नगाड़ों की गूंज से भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर भगवान का स्वागत किया और उनके दर्शन के लिए लंबी कतारों में घंटों तक इंतजार किया।
मौसीबाड़ी से भगवान की घर वापसी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पहुंचे। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंचे, जबकि दूर-दराज के जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त जगन्नाथपुर पहुंचे। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और धार्मिक वातावरण ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
मंदिर समिति के सदस्यों और सेवायतों ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की थी। दर्शन के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई थीं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल की तैनाती, यातायात नियंत्रण, बैरिकेडिंग, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। स्वयंसेवकों ने भी भीड़ प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीजगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ रथ यात्रा के दौरान मौसीबाड़ी जाते हैं और नौ दिनों के प्रवास के बाद पुनः अपने मंदिर लौटते हैं। इस घर वापसी को अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस अवसर पर भगवान के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। यही कारण है कि हर वर्ष इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
जगन्नाथपुर रथ यात्रा झारखंड के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। यहां आयोजित रथ यात्रा और भगवान की घर वापसी न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश देती है। हर वर्ग और समुदाय के लोग इस आयोजन में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के पुनः मंदिर में विराजमान होने के साथ ही इस वर्ष की रथ यात्रा महोत्सव का विधिवत समापन हो गया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

