भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और माता सुभद्रा ने दिए भक्तों को दर्शन, जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर

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भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और माता सुभद्रा ने दिए भक्तों को दर्शन, जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर


रांची, 15 जुलाई (हि.स.)। रथयात्रा महोत्सव की पूर्व संध्या पर बुधवार को धुर्वा के जगन्नाथ मंदिर में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन माता सुभद्रा ने विशेष श्रृंगार के साथ श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतार लगी रही। बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं के आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित मंदिर पहुंचे और भगवान के दर्शन कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

भगवान के दर्शन होते ही पूरा मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालु हाथ जोड़कर भगवान के समक्ष नतमस्तक हुए और विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर में बज रहे घंटे-घड़ियाल, शंखनाद और धार्मिक भजनों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। बारिश की फुहारों के बीच श्रद्धालुओं की अटूट आस्था देखने लायक रही। कई श्रद्धालु भीगते हुए भी कतार में डटे रहे और भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किए।

भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और माता सुभद्रा का विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। दर्शन के दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों और मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। श्रद्धालुओं में अगले दिन गुरुवार को निकलने वाली रथयात्रा को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।

इधर, मंदिर समिति ने रथयात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा भव्य रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। इस दौरान हजारों श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचकर धन्य होंगेे।

जगन्नाथपुर मंदिर मुख्य पजारी रामेश्वर पाढ़ी ने बताया कि नेत्रदान उत्सव के साथ भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीनों विग्रहों का अनुष्ठान संपन्न हो गया। शाम में 108 दीपों की महाआरती के साथ ही 14 दिनों बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर के पट खोल दिए गये।

वहीं, 16 जुलाई भगवान जगन्नाथ का रथ मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेगा, जो 25 जुलाई को वापस लौटेगी। प्रशासन और मंदिर न्यास समिति ने ऐतिहासिक रथयात्रा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी है।

16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि दोपहर 02 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद दर्शन बंद कर दिए जाएंगे। दोपहर 2.30 से 03 बजे के बीच सुदर्शन चक्र, श्री गरुड़, लक्ष्मी-नरसिंह, बलभद्र स्वामी, माता सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के विग्रह रथ के लिए प्रस्थान करेंगे। इसके बाद विग्रहों को रथ पर विराजमान कर श्रृंगार किया जाएगा।

शाम 04 बजे रथ पर भक्त श्री विष्णु सहस्रनाम पूजा करेंगे। शाम 4.30 से शाम 05 बजे तक मंदिर के सहायकों की ओर से भगवान के चरणों में पुष्प अर्पित किए जाएंगे। शाम 5:01 बजे भगवान जगन्नाथ का रथ मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेगा। शाम 06 बजे रथ के मौसीबाड़ी पहुंचने की संभावना है। शाम 6.05 बजे से महिलाओं को रथ पर दर्शन का अवसर मिलेगा। रात्रि 07 बजे दर्शन बंद कर विग्रहों को मौसीबाड़ी मंदिर में विराजमान कराया जाएगा। रात 08 बजे 108 की मंगल आरती के बाद शयन अनुष्ठान होगा।

प्रशासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

मंदिर न्यास समिति ने बताया कि रथ पर केवल पुजारी और अधिकृत व्यक्ति ही धोती पहनकर रहेंगे। रथ संचालन के दौरान हटिया के पुलिस उपाधीक्षक दिशा-निर्देश देंगे। वे वर्दी में रहेंगे, विष्णु सहस्रनाम पूजा के दौरान रथ सुरक्षा समिति और पुलिसकर्मी पूजा स्थल की घेराबंदी करेंगे। समिति ने बताया कि रथ धीरे-धीरे मौसीबाड़ी की ओर बढ़ेगा। वापसी रथयात्रा 25 जुलाई को निकाली जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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