झारखंड की भाषाएं राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता की आधारशिला : बंधू

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झारखंड की भाषाएं राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता की आधारशिला : बंधू


रांची, 22 जुलाई (हि.स.)। कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड की मातृभाषाएं राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता और पहचान की आधारशिला हैं। इनके संरक्षण, संवर्धन, शिक्षा और शोध के लिए ठोस प्रयास समय की आवश्यकता है। झारखंड की भाषाएं राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता और पहचान की आधारशिला हैं। तिर्की बुधवार को मोरहाबादी स्थित डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान (टीआरआई) में आयोजित जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संवाद–2026 में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

मौके पर उन्होंने भाषा संरक्षण संवर्धन को लेकर कई अहम मार्गदर्शन दिए। मौके पर झारखंड की नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के प्रतिनिधियों ने बंधु तिर्की को भाषा संरक्षण, शिक्षा और शोध को लेकर साझा रणनीति तैयार करते हुए 11 सूत्री मांग-पत्र सौंपा। कार्यक्रम में कुडुख, मुंडारी, हो, संथाली, नागपुरी, खड़िया, खोरठा, पंचपरगनिया और कुरमाली भाषाओं के कई शिक्षक, विद्वान, शोधार्थी, विद्यार्थी और भाषा प्रेमियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में सभी नौ भाषाओं के प्रतिनिधियों ने अलग-अलग समूहों में भाषा की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों, शिक्षा, शोध और विकास पर विस्तार से चर्चा की।

सभी प्रस्तावों को समेकित कर साझा मांग-पत्र तैयार किया गया, जिसे राज्य सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से बंधु तिर्की को सौंपा गया है।

संवाद में वक्ताओं ने कहा कि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोकज्ञान और सामाजिक पहचान की धरोहर हैं।

कार्यक्रम में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा के गठन की घोषणा की गई और 10 सितंबर 2026 को राज्यव्यापी जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा यात्रा निकालने का निर्णय लिया गया।

कार्यक्रम में बंधू तिर्की, डॉ प्रकाश चंद्र उरांव, पूर्व निदेशक, डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान (टीआरआई), डॉ खालिक अहमद, राजा राम महतो बंधु तिर्की, डॉ शकुंतला मिश्र, मेरी क्लोडिया सोरेंग (खड़िया), डॉ मनसिद बड़ायउद (मुंडारी) सहित बडी संख्यास में अन्य लोग मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

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