करम अखरा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और सुरक्षित रखने का संकल्प : सुदेश

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करम अखरा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और सुरक्षित रखने का संकल्प : सुदेश


रांची, 18 सितंबर (हि.स.)। राजधानी के कांके स्थित भाट बोड़ेया मैदान में आयोजित कांके विधानसभा स्तरीय करम अखरा महोत्सव–2026 में शुक्रवार को आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

सुदेश ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया और कलाकारों और कलाप्रेमियों के साथ सामूहिक नृत्य में भी शामिल हुए।

इस अवसर पर सुदेश महतो ने कहा, कि करम अखरा मात्र उत्सव नहीं, हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और सुरक्षित रखने का संकल्प भी है।

हमारी संस्कृति हमारी पहचान और हमारी सामूहिक चेतना की बुनियाद है। प्रकृति, परंपरा, लोकगीत, नृत्य, मांदर की थाप और अखरा की सामूहिकता झारखंड की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा हैं। आधुनिकता के दौर में हमें विकास के साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से बचाए रखना होगा।

उन्होंने कहा, आज दुनिया में अनेक आधुनिक वाद्य यंत्र हैं, लेकिन नगाड़े की गूंज, मांदर की थाप और ढोल की आवाज में झारखंड की अपनी आत्मा सुनाई देती है। हमारी खूबसूरती यही है कि हर बोली में संगीत और हर चाल में नृत्य बसता है। अखरा केवल नृत्य का स्थान नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने, समाज को संगठित करने और अपनी विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है।

सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए समाज का उठानी होगी जिम्मेवारी

उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी भाषा, लोकगीत, लोकनृत्य, परंपराओं और प्रकृति से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सांस्कृतिक विरासत तभी जीवित रहेगी, जब समाज स्वयं उसके संरक्षण की जिम्मेदारी उठाएगा।

महोत्सव में विशिष्ट अतिथि के रूप में पद्मश्री महावीर नायक, आजसू पार्टी के प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत और केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी केंद्रीय सचिव मोहसिन खान, केंद्रीय मीडिया संयोजक परवाज़ खान सहित अन्यक ने संयुक्त रूप से किया।

मौके पर पद्मश्री महावीर नायक, इग्नेश कुमार और लोक कला मंच कांके प्रखंड अध्यक्ष लाल अमन शाहदेव, बुढ़मू प्रमुख सत्यनारायण मुंडा, डॉ मदन,रूपलाल , रूपाश्री गाड़ी, संगीता देवी, सीमा देवी, मीना देवी की सराहनीय भूमिका रही।

कार्यक्रम में सैकडों कलाकार, कलाप्रेमी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोगों ने सहभागिता की। पारंपरिक गीत-संगीत, मांदर की थाप और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को झारखंडी संस्कृति के रंग में रंग दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

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