खरसांवा गोलीकांड में शहीदों के सपने आज भी अधूरे : देवेन्द्रनाथ
सरायकेला, 01 जनवरी (हि.स.)। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेन्द्रनाथ महतो ने कहा कि खरसावां गोलीकांड सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि झारखंडी अस्मिता की जीवंत मिसाल है। शहीदों के बलिदान के कारण ही सरायकेला का उडीसा में विलय नहीं हाे सका और झारखंड का उदय हुआ। उन्हाेंने कहा कि झारखंड गठन के 25 वर्ष बाद भी स्थानीय-नियोजन नीति, परीक्षा कैलेंडर लागू नहीं होना शहीदों के सपनों के साथ अन्याय के समान है। देवेन्द्रनाथ ने यह बातें गुरूवार को खरसावां हाट मैदान में श्रद्धांजलि सभा के दौरान शहीदों को नमन करते कही।
मौके पर
उन्होंने सभी झारखंडवासी से आह्वान किया कि वे शहीदों के सपनों का झारखंड बनाने के लिए एकजुट हों तभी आदिवासी-मूलवासी सुरक्षित रहेंगे।
देवेन्द्रानाथ ने कहा कि नववर्ष का पहला दिन भले ही दुनिया के लिए उत्सव का दिन हो, लेकिन झारखंड के लिए यह आज भी शोक और संघर्ष की याद दिलाने वाला दिन है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब सरायकेला–खरसावां–चक्रधरपुर को उड़ीसा में विलय करने की साजिश रची गई थी। तब आदिवासी–मूलवासी अपने हक और झारखंड की मांग को लेकर शांतिपूर्ण रैली में शामिल हुए थे, लेकिन उन पर निर्दयतापूर्वक गोलियां चलाई गईं।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

