झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को लेकर निकला भाषा मार्च

WhatsApp Channel Join Now
झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को लेकर निकला भाषा मार्च


रांची, 03 नवंबर (हि.स.)। जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा छात्र मोर्चा के तत्वावधान में मंगलवार को झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं, साहित्य तथा संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन को लेकर राजधानी रांची में पैदल भाषा मार्च निकाला गया।

मार्च मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से कचहरी रोड होते हुए अल्बर्ट एक्का चौक के रास्ते कोकर के भगवान बिरसा मुंडा शहीद स्थल तक पहुंचा।

मार्च में झारखंड के लगभग 30 कॉलेजों एवं आठ विश्वविद्यालयों के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकों, प्राध्यापकों ने भाग लिया।

मार्च के माध्यम से सरकार से झारखंड में केजी से पीजी तक जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई अविलंब सुनिश्चित करने की मांग की गई। साथ ही प्राथमिक स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक इन भाषाओं के शिक्षकों के स्वीकृत पदों का सृजन कर नियमित नियुक्ति करने की मांग की गई। ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और स्थानीय भाषाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए अलग भाषा बजट की व्यवस्था एवं झारखंड की भाषाओं, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा विकास के लिए स्वतंत्र साहित्य अकादमी के गठन की मांग भी उठाई गई।

मौके पर पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा यहां की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला हैं। किसी भी समाज की भाषा समाप्त होने का अर्थ उसकी संस्कृति और परंपराओं का कमजोर होना है। राज्य सरकार को स्थानीय भाषाओं के संरक्षण के लिए गंभीरता से पहल करनी चाहिए। केजी से पीजी तक इन भाषाओं की पढ़ाई सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिक्षकों की नियुक्ति और साहित्य अकादमी का गठन करना समय की मांग है।

वहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। इन भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य की नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे, इसके लिए केजी से पीजी तक स्थानीय भाषाओं की पढ़ाई सुनिश्चित करना और प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक योग्य शिक्षकों की नियुक्ति करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए अलग भाषा बजट और स्वतंत्र साहित्य अकादमी के गठन की मांग भी महत्वपूर्ण है। सरकार को इन मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर ठोस कदम उठाने चाहिए।

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के पूर्व समन्वयक प्रोफेसर डॉ. हरि उरांव ने कहा कि झारखंड की भाषाओं के संरक्षण के लिए केवल भाषण और घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके लिए ठोस शैक्षणिक और संस्थागत व्यवस्था विकसित करनी होगी।

इस अवसर पर प्रो. खालिद अहमद, प्रो. बांदे उरांव, डॉ. शकुंतला मिश्रा, डॉ. वृंदावन महतो, डॉ. दिनेश दिनमणि, डॉ. अरुण तिग्गा, प्रो. ब्लाशुश पन्ना, डॉ. अल्बीना जोजो, एनएसयूआई झारखंड प्रदेश अध्यक्ष विनय उरांव, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, शिवा कच्छप सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के भाषा समन्वयक, संयोजक, शोधार्थी और विद्यार्थी सहित अन्य मौजूद थे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

771982 Articles

Share this story