शिक्षा के साथ ही हर क्षेत्र में झारखंड में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति : सूरज मंडल

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शिक्षा के साथ ही हर क्षेत्र में झारखंड में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति : सूरज मंडल


रांची, 10 अप्रैल (हि.स.)। अखिल भारतीय संपूर्ण क्रांति राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व सांसद डॉ सूरज मंडल ने कहा है कि झारखंड गठन के बाद पिछले 25 वर्षों से शिक्षा के साथ ही हर क्षेत्र में झारखंड में स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मामले में हेमंत सरकार ने भी झारखंड में सम्पूर्ण शिक्षा विशेषकर उच्च शिक्षा की स्थिति को अत्यंत निराशाजनक स्थिति में पहुंचा दिया है। डॉ मंडल ने कहा कि कम-से-कम उच्च शिक्षा की स्थिति को सुधारने और यहां के युवाओं को सीधा लाभ पहुंचाने के लिये राज्य सरकार, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के अनुभव का लाभ उठा सकती थी, लेकिन इसमें भी वह पूरी तरीके से असफल रही।

डॉ मंडल ने रांची के लोकभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से भेंट कर उन्हें इस संदर्भ में एक ज्ञापन सौंपा।

मौके पर उन्होंने राज्यपाल से यह अपील किया कि उच्च शिक्षा की स्थिति में सुधार के लिये वे अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए राज्य सरकार को इससे संबंधित सख्त कदम उठाने का निर्देश दें। इसी का परिणाम है कि उच्च शिक्षा के मामले में उठाये गये किसी भी सकारात्मक कदम को वैसी बातों से जोड़ दिया जाता है जो घातक है।

डॉ मंडल ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास में पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने एक पूर्व मुख्यमंत्री ने डेढ़-दो घंटे मुलाकात की जिसका एजेंडा साफ नहीं है और कुल मिलाकर झारखंड में यही स्थिति शुरुआत से कायम है, जहां ऐसा लगता है कि आम जनमानस के हित में सत्ता और विपक्ष, दोनों की मंशा स्पष्ट नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य के हर विभाग में केवल और केवल भ्रष्टाचार का बोलबाला है। यही कारण है कि झारखंड अलग राज्य गठन के आंदोलनकारी के नाम पर 400 गैर आंदोलनकारियों को आंदोलनकारी का दर्जा दे दिया गया है जिन्होंने झारखंड की लड़ाई नहीं लड़ी। डॉ मंडल ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी बादल महतो की ओर से तैयार की गयी उस सूची को उन्होंने राज्यपाल को समर्पित किया है और उन्हें आन्दोलनकारियों की सूची से निकालने के लिये राज्यपाल से उन्होंने अनुरोध किया है।

पूर्व सांसद ने कहा कि 03 मई को झारखंड विधानसभा के पुराने भवन के सभा कक्ष में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के नेताओं की बैठक का आयोजन किया गया है जिसमें मुख्य रूप से ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत करने के कारण पिछले 25 साल में ओबीसी वर्ग को हुए नुकसान के बाद उत्पन्न स्थिति की समीक्षा करते हुए तीव्र आंदोलन की रणनीति तय की जायेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

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