जैन समाज ने की क्षमावाणी को राष्ट्रीय क्षमा दिवस घोषित करने की मांग
रामगढ़, 23 अगस्त (हि.स.)। दिगंबर जैन समाज रामगढ़ के सचिव योगेश सेठी ने जैन धर्म के पावन पर्व क्षमावाणी को राष्ट्रीय क्षमा दिवस के रूप में घोषित करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र प्रेषित कर इस मांग पर विचार करने का अनुरोध किया है।
अपने पत्र में योगेश सेठी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी क्षमावाणी के महत्व को स्वीकार करते हुए अपने संबोधन में ‘मिच्छामि दुक्कड़म’ कहा है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत दया, ममता, करुणा और क्षमा पर आधारित है। क्षमावाणी के पावन अवसर पर जैन धर्मावलंबी अपने से छोटे-बड़े सभी से विगत वर्ष में जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगते हैं और दूसरों को भी क्षमा करते हैं।
उन्होंने कहा कि क्षमा मांगने और क्षमा करने से दोनों पक्षों की गरिमा और आपसी संबंधों में मजबूती आती है। क्षमा की भावना समाज में शांति, सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देती है।
योगेश सेठी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि जिस प्रकार दूरदर्शी पहल के माध्यम से योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है, उसी प्रकार क्षमावाणी को राष्ट्रीय क्षमा दिवस के रूप में मान्यता देने के विषय में भी विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने समस्त जैन समाज की ओर से आग्रह करते हुए कहा कि इस विषय पर जल्द निर्णय लेते हुए इसी वर्ष से क्षमावाणी को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत की जाए।
उपरोक्त जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी श्रवण जैन ने दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

