राज अस्पताल मामले में जांच टीम पहुंची अस्पताल, खंगाल रही दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड
रांची, 04 जुलाई (हि.स.)। रांची के राज अस्पताल में इलाज के दौरान 18 वर्षीय युवक की मौत के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने सिविल सर्जन के माध्यम से जिला स्तरीय विशेष जांच टीम गठित की। शनिवार को परियोजना पदाधिकारी मनीषा तिर्की के नेतृत्व में जांच दल अस्पताल पहुंचा और मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और बिलिंग प्रक्रिया की जांच शुरू की। जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी।
बताया जाता है कि लातेहार निवासी 18 वर्षीय युवक राजू कुमार रंजन का सड़क दुर्घटना में पैर टूट गया था। करीब 40 दिन पहले उसे राज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसके पैर में इंफेक्शन हो गया और अंततः उसकी मौत हो गई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने उसके परिजनों को 22 लाख रुपये का बिल थमा दिया। इसके बाद राजू कुमार रंजन के परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल में जमकर हंगामा मचाया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों और प्रबंधन की लापरवाही के कारण राजू की मौत हो गई। परिजनों के दवाब में राजू का पोस्टमार्टम रिम्स में कराया गया है। ताकि मौत के कारणों का पता चल सके और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
राज अस्पताल ने मरीज की मौत के आरोपों को बताया निराधार, कहा- जांच में कर रहे पूरा सहयोग
राज अस्पताल ने मरीज राजू कुमार रंजन के उपचार को लेकर जारी विवाद पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए चिकित्सीय लापरवाही के सभी आरोपों को निराधार बताया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज को 24 मई 2026 को एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद पॉलीट्रॉमा की स्थिति में भर्ती कराया गया था। उसके सिर, मस्तिष्क, गर्दन, रीढ़, फेफड़ों और पैर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें और फ्रैक्चर थे। अस्पताल के अनुसार, मरीज का इलाज आईसीयू में वरिष्ठ न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों और अन्य चिकित्सकों की बहु-विषयक टीम की निगरानी में स्थापित चिकित्सा मानकों के अनुरूप किया गया। उपचार के दौरान आवश्यक जांच, वेंटिलेटर सपोर्ट, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, ऑपरेशन, डिब्राइडमेंट सहित सभी जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं की गईं।
प्रबंधन ने बताया कि मरीज के बाएं पैर में रक्त संचार पूरी तरह प्रभावित होने, संक्रमण और गंभीर जटिलताओं के कारण पिछले चार दिनों से चिकित्सकों ने कई बार पैर काटने (एम्प्यूटेशन) की सलाह दी थी, लेकिन परिजनों ने इसके लिए सहमति नहीं दी। अस्पताल का दावा है कि यह तथ्य चिकित्सीय अभिलेखों में दर्ज है।
अस्पताल ने कहा कि मरीज की गंभीर स्थिति दुर्घटना में लगी जानलेवा चोटों और उनसे उत्पन्न जटिलताओं का परिणाम है, न कि चिकित्सकों या अस्पताल की किसी लापरवाही का। उपचार के प्रत्येक चरण में मरीज के परिजनों को स्थिति, जोखिम और उपचार योजना की जानकारी दी जाती रही।
राज अस्पताल ने यह भी आरोप लगाया कि उपचार के दौरान मरीज के परिजनों की ओर से अस्पताल परिसर में हंगामा और विरोध-प्रदर्शन किया गया, जिससे कई घंटों तक अस्पताल की सामान्य सेवाएं प्रभावित हुईं और अन्य मरीजों के इलाज में भी व्यवधान उत्पन्न हुआ। अस्पताल के अनुसार, ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का घेराव भी किया गया, हालांकि इसके बावजूद मरीज के उपचार में कोई कमी नहीं आने दी गई।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि 04 जुलाई 2026 को गठित सरकारी जांच टीम ने मामले की जांच की, जिसमें इलाजरत डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन ने पूरा सहयोग किया। अस्पताल के अनुसार जांच टीम को मांगे गए सभी दस्तावेज, चिकित्सीय रिकॉर्ड और आवश्यक तथ्य उपलब्ध करा दिए गए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग कर रहा है और सत्य तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच होने का विश्वास रखता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

