गरीब परिवार को शव देने के लिए अस्पताल ने थमाया भारी बिल

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गरीब परिवार को शव देने के लिए अस्पताल ने थमाया भारी बिल


गरीब परिवार को शव देने के लिए अस्पताल ने थमाया भारी बिल


गरीब परिवार को शव देने के लिए अस्पताल ने थमाया भारी बिल


चतरा, 19 अगस्त (हि.स.)। चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड अंतर्गत चोपे पंचायत के बड़गांव निवासी एक गरीब परिवार इन दिनों भारी संकट से गुजर रहा है। परिवार के मुखिया एवं ट्रक चालक शिवसागर उपाध्याय (38 वर्ष), पिता स्व. रामलखन उपाध्याय की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद उनकी पत्नी निक्की देवी अपने चार छोटे-छोटे बच्चों के साथ पिछले दो दिनों से रांची के बूटी मोड़, बरियातू स्थित आलम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के बाहर बैठी हुई हैं।

मिली जानकारी के अनुसार 12 अगस्त को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में शिवसागर उपाध्याय एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बताया जाता है कि वह ट्रक से नीचे उतरे थे। तभी एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें कुचल दिया। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। जहां से बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित आलम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया।

मृतक की पत्नी निक्की देवी ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। पति के इलाज के लिए उन्होंने गाय-बकरी बेच दी और ग्रामीणों से सहयोग लेकर अस्पताल द्वारा मांगी गई लगभग ढाई लाख रुपये की राशि जमा कर दी। इसके बावजूद इलाज के दौरान शिवसागर की मौत हो गई।

परिजनों का आरोप है कि शव लेने पहुंचने पर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें दो लाख पांच हजार रुपये का अतिरिक्त बिल थमा दिया। आर्थिक तंगी से जूझ रही निक्की देवी के पास अब कोई संसाधन नहीं बचा है। उनका कहना है कि बिल का भुगतान नहीं कर पाने के कारण अस्पताल प्रबंधन शव नहीं दे रहा है और उन्हें अपमानित कर बाहर भगा दिया गया है।

निक्की देवी अपने चार बच्चों के साथ अस्पताल परिसर के बाहर ही बैठी हैं। परिवार के पास खाने-पीने तक की व्यवस्था नहीं है।

पीड़ित परिवार ने सरकार, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों से मदद की गुहार लगाई है ताकि मृतक का शव उन्हें मिल सके और वे अपने पति का अंतिम संस्कार कर सकें।

इस हृदयविदारक घटना ने गरीब परिवारों के समक्ष इलाज और चिकित्सा व्यवस्था की कठिन वास्तविकताओं को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अब पीड़ित परिवार को किसी मसीहा और प्रशासनिक हस्तक्षेप का इंतजार है।

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हिन्दुस्थान समाचार / जितेन्द्र तिवारी

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