सीजीएल रद्द करने की जिद छोड़ संवाद का रास्ता अपनाएं छात्र, आंदोलन करें खत्म : सुदिव्य
रांची, 09 अगस्त (हि.स.)। उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा है कि जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े तमाम मुद्दों पर सरकार छात्रों से वार्ता करने के लिए तैयार है और उनकी अधिकांश मांगों को स्वीकार भी कर चुकी है। ऐसे में केवल सीजीएल परीक्षा को रद्द कर सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सीजीएल परीक्षा की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर से हुई है और इसकी भर्ती प्रक्रिया भी न्यायालय की निगरानी में रही है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार अपने स्तर से परीक्षा रद्द करने की स्थिति में नहीं है।
मंत्री सुदीप कुमार सोनू रविवार को सूचना भवन स्थित सभागार में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्यभर के छात्रों और उनके अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि छात्र हठधर्मिता छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाएं। आंदोलन तब किया जाता है, जब सरकार आपकी बातें सुनने को तैयार नहीं होती। जब सरकार छात्रों की मांगों पर बातचीत कर रही है और समाधान के लिए तैयार है, तो उसे समझने की जरूरत है। उन्होंने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की।
मंत्री ने कहा कि पिछले तीन दिनों से आंदोलनरत छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार ने तीन स्तरों पर वार्ता की। इसमें संदिग्ध परीक्षाओं की जांच, परीक्षाओं को रद्द करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार (रिफॉर्म) से संबंधित मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। जांच से जुड़े मामलों में सरकार ने जेपीएससी की गड़बड़ियों के संबंध में कई जगह छापेमारी कर कार्रवाई की है। डिजिटल दस्तावेज और साक्ष्य जब्त किए गए हैं एवं संदिग्ध लोगों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसके अलावा जेपीएससी के अध्यक्ष और सदस्यों से इस्तीफा लिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने महसूस किया है कि मामला और व्यापक हो सकता है। ऐसी स्थिति में जेपीएससी से जुड़े घपले, घोटाले और अनियमितताओं की जांच सीआईडी से कराई जाएगी। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी आग्रह पत्र भेजा जाएगा, ताकि यदि कहीं आर्थिक लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो उसकी भी जांच हो सके। सरकार की मंशा किसी दोषी को बचाने की नहीं है और जांच के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
परीक्षाओं को रद्द करने की मांग पर मंत्री ने कहा कि चौथी जेपीएससी, बैकलॉग, 2023 और 2025 से संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने पर सरकार सहमत हुई है। इसके अलावा टीडीपीएल संस्था की ओर से आयोजित सभी संबंधित परीक्षाओं की व्यापक और विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि जांच में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसके आधार पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।
सीजीएल परीक्षा के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांग परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच कराने की है। लेकिन चूंकि पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई है, इसलिए राज्य सरकार के लिए फिलहाल इसे रद्द करना संभव नहीं है। बावजूद इसके सरकार ने पूरे मामले की जांच प्रक्रिया की निगरानी के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में रिफॉर्म के मुद्दे पर भी सरकार करीब 98 फीसदी मांगों पर सहमत हो चुकी है। इसके लिए आईआईएसएम, आईआईएम और जमशेदपुर के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थानों की विशेषज्ञ सेवाएं ली जाएंगी। इसमें स्टेकहोल्डर के रूप में छात्रों से भी सुझाव लिए जाएंगे। सरकार ने ई-मेल के माध्यम से भी सुझाव मांगे हैं।
मंत्री ने कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद छात्र सीजीएल परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हुए हैं, जिसके कारण समझौता वार्ता टूट गई। उन्होंने छात्रों से अपील की कि सरकार ने जिन मांगों को स्वीकार किया है, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत पूरा करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में आंदोलन का रास्ता छोड़कर संवाद के माध्यम से अपनी बातें सरकार के समक्ष रखी जाएं। विधानसभा घेराव प्रदर्शन सहित अन्य आंदोलन का रास्ता छोड़कर सरकार से सकारात्मक संवाद स्थापित करें।
मौके पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के अलावा मंत्री संजय प्रसाद यादव, दीपिका पांडेय, चमरा लिंडा सहित अन्य मौजूद थे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

