जनजातीय समाज हमारी राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है: राज्यपाल
रांची, 06 जून (हि.स.)। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने जनजातीय युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और तकनीक को अपनाना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही अपनी भाषा, लोककला, लोकसंगीत और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
राज्यपाल शनिवार को रांची के ऑड्रे हाउस में आयोजित “आदि वार्ता – ए ट्राइबल कांक्लेव” को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा, खेल, प्रशासन, विज्ञान, कला और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ते हुए जनजातीय समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी सहेजकर रखना होगा। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित है और जनजातीय समाज देश की राष्ट्रीय चेतना एवं सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है।
राज्यपाल ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य तभी पूर्ण होगा, जब जनजातीय समाज की भागीदारी, सम्मान और नेतृत्व को समान महत्व दिया जाएगा। इसके लिए विकास और संस्कृति, आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाकर समावेशी समाज के निर्माण की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सामुदायिक जीवन मूल्यों और प्रकृति के साथ गहरे संबंधों के लिए विशेष पहचान रखता है। जनजातीय परंपराएं सह-अस्तित्व, सामाजिक समरसता और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देती हैं, जो पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का विकास तभी सार्थक माना जा सकता है जब उसकी सांस्कृतिक अस्मिता सुरक्षित रहते हुए प्रगति सुनिश्चित की जाए।
राज्यपाल सतोष कुमार गंगवार ने संविधान में अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए किए गए प्रावधानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास और आर्थिक सशक्तीकरण को जनजातीय विकास की बुनियादी आवश्यकता बताया। विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर बल दिया तथा सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों से मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने अपने विभिन्न जिलों के दौरे का उल्लेख करते हुए जनजातीय समाज की प्रतिभा, मेहनत और सामुदायिक भावना की सराहना की। साथ ही जनजातीय महिलाओं की आत्मनिर्भरता और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उनके योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।
विश्व पर्यावरण दिवस का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और अस्तित्व का आधार मानता आया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन सतत विकास का मार्ग दिखाता है, जिसमें विकास और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चलते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सशक्तीकरण के लिए की गई विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया, जिनमें भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाना, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का विस्तार और पीएम-जनमन जैसी योजनाएं शामिल हैं।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

