सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो आरोपित गिरफ्तार और दो नाबालिग निरुद्ध

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सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो आरोपित गिरफ्तार और दो नाबालिग निरुद्ध


सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो आरोपित गिरफ्तार और दो नाबालिग निरुद्ध


रांची, 29 सितंबर (हि.स.)। राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और लूटपाट मामले का पुलिस ने मंगलवार को खुलासा किया है। मामले में कार्रवाई करते हुए रांची पुलिस में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है और वारदात में शामिल दो नाबालिगों को निरुद्ध किया है। रांची के ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि करमा पूजा का मेला देखकर घर लौट रही युवती को चार आरोपितों ने रास्ते में रोक लिया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया था। आरोपियों ने पीड़िता का मोबाइल फोन और गले की चेन भी छीन ली थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की थी। फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपित संदीप मुंडा उर्फ रावण और सुनील मुंडा को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही कांड में शामिल दो नाबालिगों को भी निरुद्ध किया।

एसपी ने बताया कि घटना 22 सितंबर 2020 की देर रात करीब 12.30 से 01 बजे के बीच की है। पीड़िता रातू थाना क्षेत्र की रहने वाली है। वह करमा पूजा के अवसर पर लगे मेले से लौट रही थी। रात काफी हो चुकी थी और युवती अकेली अपने घर की ओर जा रही थी। जब वह अपनी नानी के घर के पास पहुंचने वाली थी, उससे पहले ही चार आरोपितों ने उसे अपने कब्जे में ले लिया।

आरोपितों ने उसे जबरन सुनसान स्थान पर ले जाने के दौरान उसके साथ मारपीट भी की। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपितों ने पीड़िता से अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से उसके कान और आंखों पर जोर से दबाव डाला। सुनील मुंडा ने कथित तौर पर उसके कान पर तेजी से दबाव बनाया। इसके बाद उसकी आंखों पर भी दबाव डाला गया, ताकि वह आरोपितों को देख या पहचान नहीं सके।

आरोपित पीड़िता को उसके नानी के घर से लगभग 50 से 100 मीटर दूर ले गए। जहां चारों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपितों ने पीड़िता का मोबाइल फोन और गले में पहनी चेन भी छीन ली। पुलिस के मुताबिक, छीने गए मोबाइल फोन की कीमत करीब 50 से 60 हजार रुपये थी। आरोपितों ने मोबाइल को बाद में दूसरी जगह ले जाकर बेच दिया था।

इस केस को सुलझाना पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी, क्योंकि पीड़िता ने किसी भी आरोपित को पहचानने में असमर्थता जताई थी। घटना के दौरान न तो वह आरोपितों को ठीक से देख सकी थी और न ही उनकी आवाज पहचान पाई थी। ऐसे में पुलिस के सामने आरोपितों तक पहुंचने के लिए प्रत्यक्ष पहचान के बजाय वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच करने की चुनौती थी। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने एसआईटी गठित की जिसमें डीएसपी मुख्यालय-2 अजय, रातू थाना प्रभारी और थाना के अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया। एसआईटी ने सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का परीक्षण किया। इसके साथ ही तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया गया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को सबसे पहले संदीप मुंडा उर्फ रावण के बारे में जानकारी मिली। संदीप चटकपुर का रहने वाला है और उसका पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है।

पुलिस के अनुसार, संदीप मुंडा पहले सुखदेवनगर थाना कांड संख्या 395/17 में चोरी के मामले में जेल जा चुका था। उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और जांच में मिले तथ्यों के आधार पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। संदीप मुंडा को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए सुनील मुंडा सहित दो अन्य लोगों के नाम बताए।

जांच में कुल चार लोगों की संलिप्तता सामने आई। इनमें दो 18 वर्ष से कम उम्र के हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में ग्रामीणों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। पीड़िता आरोपितों को नहीं पहचानती थी। ऐसे में स्थानीय लोगों से मिली जानकारी, घटनास्थल से जुटाए गए फॉरेंसिक साक्ष्य और तकनीकी जांच को जोड़कर पुलिस ने आरोपितों तक पहुंचने में सफलता हासिल की। एसआईटी के सदस्यों ने कई दिनों तक लगातार मेहनत कर मामले की कड़ियां जोड़ीं। पुलिस ने इसे चुनौतीपूर्ण मामला बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानीय लोगों के सहयोग से चारों आरोपितों की पहचान की जा सकी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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