रामगढ़ महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा और एआई पर विशेष व्याख्यान

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रामगढ़ महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा और एआई पर विशेष व्याख्यान


रामगढ़, 10 जून (हि.स.)। रामगढ़ महाविद्यालय में आयोजित संकाय विकास कार्यक्रम के पांचवें दिन बुधवार को शिक्षकों के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में जिला समन्वयक सह प्राचार्या डॉ रत्ना पाण्डेय की देखरेख में संपन्न हुआ। मुख्य संसाधन सेवी के रूप में का काजी नजरूल इस्लाम यूनिवर्सिटी आसनसोल के डॉ सुमित पारोई ने और इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन, वाराणसी के डॉ राज सिंह ने व्याख्यान दिए, प्रयोग करवाए और प्रायोगिक परीक्षण करवाए।

डॉ सुमित पारोई ने अपने व्याख्यान में कहा कि सबसे पहले नई शिक्षा नीति 2020 को पढ़ना और जानना चाहिए। उसके बाद भारतीय ज्ञान परंपरा को इस तरह समझना चाहिए कि यह आधुनिक काल में लागू करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल जैसे गुरुकुल प्रणाली और संवाद प्रणाली में अपने आप को समझने के लिए शिक्षा लिया जाता है। साथ ही नैतिक शिक्षा ही असल शिक्षा थी। आज हमारा उद्देश्य संकीर्ण हो गया है। लेकिन आधुनिक काल में सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है। सामादायिक शोध और सामुदायिक समस्याओं का के हल के लिए शोध करना चाहिए। उन्होंने विभिन्न सामुदायिक शोध के नतीजे को उदाहरण स्वरूप पेश किया जिसमें गुजरात के राजकोट जिले के मनसुख भाई प्रजापति के मिट्टी कुल रेफ्रिजरेटर शामिल है। एआई टूल से शोध में सहयोग लिया जा सकता है।

वहीं डॉ राज सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शिक्षार्थी को जिज्ञासु और उत्सुक बनकर सीखने की जरूरत पर जोर दिया गया है। पर्यावरण-अनुकूल शिक्षा प्रणाली अपनाने और शिक्षाशास्त्र और मूल्यांकन की स्वच्छ प्रणाली अपनाने पर जोर दिया गया है। कार्यक्रम में जिले के महाविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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