कृषि पर एल नीनो का प्रभाव और आकस्मिक फसल योजना पर चर्चा

WhatsApp Channel Join Now
कृषि पर एल नीनो का प्रभाव और आकस्मिक फसल योजना पर चर्चा


रामगढ़, 04 जुलाई (हि.स.)। जिले के कृषि कार्य पर एलनीनो का प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी हालात में किसानों के लिए आकस्मिक फसल योजना ही बैकबोन साबित हो सकती है। रामगढ़ डीसी ऋतुराज ने शनिवार को आकस्मिक फसल योजना की समीक्षा की। डीसी ने एल नीनो के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जिला आकस्मिक फसल योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बैठक आयोजित की।

बैठक में कृषि और संबद्ध विभागों के पदाधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों तथा गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

डीसी ने कहा कि संभावित वर्षा की कमी या सूखे की स्थिति से किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय रहते प्रभावी रणनीति तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कृषि विभाग को सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर वैकल्पिक फसल व्यवस्था एवं कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया।

बैठक में खरीफ मौसम की मुख्य फसल धान के लिए कम अवधि वाली और सूखा-रोधी किस्मों के प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) पर विशेष बल दिया गया। साथ ही जिले में 20 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की सीधी बुवाई का प्रदर्शन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। डीसी ने पतरातू, मांडू और दुलमी प्रखंडों में मड़ुवा की खेती का प्रदर्शन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके अलावा किसानों की आय बढ़ाने एवं जोखिम कम करने के उद्देश्य से अंतर कृषि प्रणाली के तहत मक्का, अरहर, उड़द एवं भिंडी जैसी फसलों को अपनाने पर भी बल दिया गया।

बैठक के दौरान जिले में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की बात कही गई। इसके लिए आवश्यकता अनुसार विस्तृत प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया।

बैठक में पशुपालन को सुदृढ़ बनाने के लिए साइलेज और हे (पशु चारा) निर्माण इकाइयों की स्थापना एवं इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। डीसी ने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। मृदा स्वास्थ्य सुधार के उद्देश्य से सभी प्रखंडों के एटीआईसी सेंटरों में किट के माध्यम से मिट्टी जांच की व्यवस्था स्थापित करने पर भी चर्चा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

डीसी ने बंद पड़ी खदानों का उपयोग मत्स्य पालन के लिए किए जाने की संभावनाओं पर बल दिया। जिला खनन पदाधिकारी और जिला मत्स्य पदाधिकारी को डीडीसी के मार्गदर्शन में संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

Share this story