शिक्षा समाज की चेतना और राष्ट्र की प्रगति का आधार है : राज्यपाल
रांची, 20 मई (हि.स.)। राज्यपाल-सह-झारखण्ड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की चेतना एवं राष्ट्र की प्रगति का आधार है। विश्वविद्यालय विचार, ज्ञान, अनुशासन, शोध और चरित्र निर्माण के केंद्र होते हैं। किसी भी राज्य का भविष्य उसके शिक्षण संस्थानों में ही आकार लेता है।
राज्यपाल गुरुवार को रांची के चाणक्य बीएनआर होटल में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय कुलपति सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि यह सम्मेलन झारखण्ड की उच्च शिक्षा को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रदेश में स्कूली शिक्षा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभी व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य का सकल नामांकन अनुपात राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है तथा उच्च शिक्षा में ड्रॉपआउट की समस्या भी गंभीर है। गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण, समयबद्ध परीक्षाओं एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा के अभाव में बड़ी संख्या में विद्यार्थी राज्य से बाहर जाने को विवश होते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति हम सभी के लिए आत्ममंथन का विषय है।
राज्यपाल ने कहा कि अब समय केवल समस्याओं की चर्चा करने का नहीं, बल्कि समाधान और परिणाम के साथ आगे बढ़ने का है। विश्वविद्यालयों की पहचान केवल भवनों एवं परिसरों से नहीं, बल्कि उनके शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन, शोध, नवाचार एवं उपलब्धियों से होती है। उन्होंने कहा कि जिस दिन झारखण्ड के विद्यार्थी यह महसूस करेंगे कि उसे बेहतर शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है, उस दिन हम कह सकेंगे कि हमारा प्रयास वास्तव में सफल हुआ है।
राज्यपाल गंगवार ने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सर्च कमिटी के माध्यम से की गई है और उनसे बहुत अपेक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि कुलपति केवल प्रशासक नहीं, बल्कि अकेडमिक लीडर के रूप में कार्य करें। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को नई गति एवं दिशा देने के उद्देश्य से ‘झारखण्ड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026’ लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी कुलपतियों एवं विश्वविद्यालय पदाधिकारियों से नए अधिनियम का गंभीरता से अध्ययन करने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में अकेडमिक कैलेंडर का दृढ़ता से पालन सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि नियमित कक्षाएं संचालित हों, पाठ्यक्रम समय पर पूर्ण हो तथा परीक्षाएं एवं परिणाम निर्धारित समय-सीमा में प्रकाशित किए जाएं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता का शिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने शोध, नवाचार, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र न बनें, बल्कि नवाचार एवं कौशल विकास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित हों।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

