ईडी ने रिम्स की जमीन खरीद बिक्री के मामले में ईसीआईआर दर्ज कर जांच की शुरू

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ईडी ने रिम्स की जमीन खरीद बिक्री के मामले में ईसीआईआर दर्ज कर जांच की शुरू


रांची, 21 मई ( हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिम्स के लिए अधिगृहित जमीन की खरीद बिक्री के मामले में ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ईडी ने ईसीआईआर दर्ज करने के लिए भ्रष्टाचार निररोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर से दर्ज की गयी प्राथमिकी को आधार बनाया है। एसीबी ने इस मामले की जांच के दौरान अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज ईसीआईआर (प्राथमिकी) में राजस्व के काम से जुड़े अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद मानी गयी है। इसमें अंचल कार्यालय से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा रिम्स के लिए अधिगृहित जमीन पर फ्लैट बनाने वाले बिल्डर सहित झारखंड रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (झारेरा), रांची नगर निगम (आरएमसी) के अधिकारियों की भूमिका को संदेहास्पद माना गया है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से ईसीआईआर दर्ज करने के बाद संदेहास्पद भूमिका वाले अधिकारियों से पूछताछ करेगी। ईडी ने मामले की जांच शुरु कर दी है।

उल्लेखनीय है कि एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद रिम्स की जमीन की अवैध खरीद बिक्री के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इसमें राजकिशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक, राजेश कुमार झा और चेतन कुमार का नाम शामिल है। एसीबी ने राजकिशोर बड़ाईक और कार्तिक बड़ाईक पर जालसाजी कर फर्जी वंशावली बना कर जमीन को अपना बताने का आरोप लगाया है। इन दोनों ने फर्जी वंशावली बनाने क बाद रिम्स की अधिगृहित जमीन को बेचने के लिए चेतन कुमार को पावर ऑफ ऑटर्नी दिया। राजेश कमार झा ने जमीन बिल्डर से बेचवाया। एसीबी ने जांच से संबंधित सील बंद रिपोर्ट भी हाईकोर्ट को सौंपी है।

गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान एसीबी को रिम्स के लिए अधिगृहित जमीन की खरीद बिक्री के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच का आदेश दिया था। न्यायालय ने सरकार को रिम्स की जमीन की अवैध खरीद बिक्री की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू करने का आदेश दिया था।

न्यायालय ने रिम्स की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने रिम्स के लिए अधिगृहित जमीन पर बने बहुमंजिली इमारत को ध्वस्त कर दिया था। इससे इस आवासीय भवन में फ्लैट खरीदने वाले बेघर हो गये और उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ। न्यायालय ने घर खरीदने वाले आम लोगों को हुए नुकसान की भरपाई इस पूरे प्रकरण में दोषी पाये जाने वाले अधिकारियों से वसूल कर करने का निर्देश दिया है।

न्यायालय ने झालसा के सदस्य सचिव रंजना अस्थाना को रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण की जांच का आदेश दिया था। उन्होंने इसकी जांच कर उच्च् न्यायालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि रिम्स के लिए अधिगृहित जमीन मौजा मोरहाबादी, मौजा कोकर, मौजा बरियातु और मौजा तिरिल में है। रिम्स की मोरहाबादी मौजा की जमीन में से आठ एकड़ और कोकर मौजा की जमीन पर 1.65 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। बरियातु और तिरिल मौजा की जमीन पर अतिक्रमण नहीं है।

रिपोर्ट में रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण कर मंदिर, दुकान, भवन, स्कूल, सरना स्थल, पार्क, आवासीय भवन सहित अन्य प्रकार का निर्माण किये जाने का उल्लेख किया गया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि अतिक्रमण के इस मामले में रिम्स प्रबंधन के प्राथमिकी दर्ज नहीं करायी न ही जिला प्रशासन ने अतिक्रमण के इस मामले को गंभीरता से लिया ।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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