केवीआईसी घोटाले में ईडी ने छह के खिलाफ दायर किया आरोप पत्र

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केवीआईसी घोटाले में ईडी ने छह के खिलाफ दायर किया आरोप पत्र


रांची, 25 मार्च (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए ), 2002 की धारा 44 और 45 के तहत छह आरोपितों के खिलाफ (प्रॉसीक्यूशन कंप्लेन) आरोप पत्र दर्ज की है। यह मामला खादी और ग्रामाेद्योग आयोग (केवीआईसी) रांची के राज्य कार्यालय में हुए लगभग 3.89 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है।

ईडी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सुनील कुमार (तत्कालीन कार्यकारी, केवीआईसी), अमन कुमार, शाहिल, प्रिया, बिनोद कुमार बैठा (तत्कालीन वरिष्ठ कार्यकारी, प्रशासन एवं एचआर, केवीआईसी रांची) और बंकू निषाद के विरुद्ध विशेष न्यायाधीश, सीबीआई-सह-पीएमएलए, रांची के समक्ष अभियोजन शिकायत दायर की है।

ईडी ने सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), रांची की ओर से दर्ज एफआईआर और आरोप-पत्र के आधार पर जांच शुरू की थी। इसमें आईपीसी, 1860 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक कदाचार के अपराध शामिल हैं।

ईडी ने बताया कि मूल अपराध केवीआईसी रांची में सरकारी धन के व्यवस्थित गबन से संबंधित है। सुनील कुमार ने अपने रिश्तेदारों और सह-आरोपियों के साथ साजिश रचकर काल्पनिक इकाइयों और एक नकली सीआइएन वाली शेल कंपनी बनाई।

खादी सुधार और विकास कार्यक्रम (केआरडीपी) के तहत स्वीकृत लगभग 3.89 करोड़ रुपये बिना किसी वास्तविक कार्य के अपने रिश्तेदारों के व्यक्तिगत बैंक खातों में हस्तांतरित कर दिए गए। सह-आरोपितों ने जानबूझकर अपने बैंकिंग प्रमाण-पत्र सौंपे और खाली चेक पर हस्ताक्षर किए, जिससे अपराध की आय को प्रॉक्सी खातों के जरिए प्राप्त करने, कब्जे में लेने और परतबद्ध करने में सहायता मिली।

ईडी की जांच से पता चला कि अपराध की आय को व्यावसायिक विक्रेताओं को भुगतान के माध्यम से परिबद्ध किया गया।

इस राशि को सुनील कुमार की पत्नी के नाम पर रांची के ओरमांझी इलाके में अधिग्रहित अचल संपत्तियों में एकीकृत कर लिया गया। पंजीकृत दस्तावेजों में वास्तविक बिक्री मूल्य को जानबूझकर कम दिखाकर छिपाया गया।

जांच के दौरान सुनील कुमार के आवासीय परिसर पर पीएमएलए की धारा 17 के तहत सर्च ऑपरेशन किया गया। ईडी ने प्रॉविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) के माध्यम से लगभग 71.91 लाख रुपये मूल्य की अचल और चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (संलग्न) किया, जिसकी पुष्टि निपटान प्राधिकारी की ओर से की गई। इसके अलावा, अपराध की आय से आश्रम कल्याण निधि न्यास ट्रस्ट, रांची को हस्तांतरित 31.11 लाख रुपये को ट्रस्ट की ओर से स्वेच्छा से ईडी को जमा कर दिया गया। मामला वर्तमान में विशेष न्यायालय में विचाराधीन है और आगे की जांच जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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