डीएसपीएमयू में पारदर्शी नामांकन-सीटें बरकरार रखने की मांग

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डीएसपीएमयू में पारदर्शी नामांकन-सीटें बरकरार रखने की मांग


रांची, 13 जुलाई (हि.स.)। आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) के कुलपति प्रो (डॉ) राजीव मनोहर को ज्ञापन सौंपकर यूजी और पीजी नामांकन प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाने एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की सीटों में किसी प्रकार की कटौती नहीं करने की मांग की। संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इन पाठ्यक्रमों में हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र आवेदन करते हैं।

सीटें घटने से विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को नुकसान होगा। साथ ही झारखंडी भाषाओं को बढ़ावा देने और जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करने की मांग की गई।प्रतिनिधिमंडल ने मेरिट सूची, कट-ऑफ, रिक्त सीटों का विवरण एवं स्पॉट एडमिशन की जानकारी समय-समय पर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जारी करने, प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने तथा सभी विभागों के नोटिस बोर्ड पर सीट मैट्रिक्स और मेरिट सूची प्रदर्शित करने की भी मांग की। कुलपति प्रो. (डॉ.) राजीव मनोहर ने छात्रहित को सर्वोपरि बताते हुए सभी मांगों पर नियमानुसार विचार कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में कहा गया कि नामांकन प्रक्रिया में किसी भी निजी एजेंसी अथवा तृतीय पक्ष की भागीदारी नहीं होनी चाहिए। दस्तावेज़ सत्यापन एवं नामांकन संबंधी सभी कार्य केवल विश्वविद्यालय के स्थायी शिक्षकों एवं अधिकृत अधिकारियों द्वारा कराए जाएं, ताकि विद्यार्थियों का विश्वास बना रहे और अनियमितताओं पर रोक लग सके।

संघ ने बीबीए, एमबीए, कंप्यूटर विज्ञान, वाणिज्य तथा कुड़ुख (उरांव), संथाली, मुंडारी, हो और खड़िया जैसे जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा पाठ्यक्रमों की सीटों में कटौती की आशंका पर चिंता जताई। ज्ञापन सौंपने के दौरान कई लोग मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

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