आदिवासी पहचान और अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है: गीताश्री उरांव

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आदिवासी पहचान और अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है: गीताश्री उरांव


रांची, 23 मई (हि.स.)। झारखंड की पूर्व मंत्री सह कांग्रेस नेत्री गीताश्री उरांव ने कहा है कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन तथा पारंपरिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि षड्यंत्र के तहत आदिवासियों को डीलिस्टिंग की प्रक्रिया में धकेला जा रहा है।

रांची के सिरम टोली सरना स्थल में शनिवार को आदिवासी समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा दिल्ली में आयोजित होने वाले जनजाति समागम के विरोध में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं।

गीताश्री उरांव ने कहा कि देशभर के आदिवासी अपने सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के संरक्षण के लिए लंबे समय से धर्म कॉलम को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से पिछले तीन वर्षों से धर्मांतरित आदिवासियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर सरना और सनातन को एक बताकर आदिवासी समाज को हिंदू पहचान के भीतर समाहित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों के धर्म कॉलम को हटाने की कोशिश की जा रही है, जिस पर संबंधित मंचों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाती।

इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज के अस्तित्व और अधिकारों पर लगातार खतरे की स्थिति बनी हुई है, ऐसे में किसी भी प्रकार की साजिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

कार्यक्रम में मौजूद अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आदिवासी समाज से एकजुट रहने और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।

प्रेस वार्ता में शीला उरांव, सिलिना लकड़ा और ज्योत्स्ना केरकेट्टा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

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