रांची में 09 से 11 अप्रैल तक मक्का पर राष्ट्रीय मंथन, 250 से अधिक वैज्ञानिक बीएयू में जुटेंगे

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रांची में 09 से 11 अप्रैल तक मक्का पर राष्ट्रीय मंथन, 250 से अधिक वैज्ञानिक बीएयू में जुटेंगे


रांची, 08 अप्रैल (हि.स.)। रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में 09 से 11 अप्रैल तक मक्का संबंधी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 69वीं वार्षिक कार्यशाला आयोजित होगी। इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर के 250 से अधिक कृषि वैज्ञानिक भाग लेंगे।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मक्का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ बदलते जलवायु परिदृश्य में इसके क्षेत्र विस्तार की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना है। इसके अलावा मक्का उत्पादन के लिए एक ठोस रोडमैप भी तैयार किया जाएगा।

कार्यक्रम में नई उच्च उपज वाली किस्मों की पहचान की जाएगी और वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों की उपलब्धियों की समीक्षा भी होगी। इसमें स्टार्च, फीड, एथेनॉल, बीज, कृषि रसायन और कृषि यंत्र से जुड़े उद्योगों के प्रतिनिधि, राष्ट्रीय एवं राज्य बीज निगमों के सदस्य, प्रगतिशील किसान तथा देश के 37 कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल होंगे।

कार्यशाला की आयोजन सचिव और बीएयू के आनुवंशिकी एवं पौधा प्रजनन विभाग की अध्यक्ष डॉ. मणिगोपा चक्रवर्ती ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक और भारत सरकार के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. मांगी लाल जाट कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। उद्घाटन सत्र की सह-अध्यक्षता आइसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव और बीएयू के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे करेंगे।

कार्यशाला में कई प्रमुख विशेषज्ञ भी भाग लेंगे, जिनमें आइसीएआर के सहायक महानिदेशक (खाद्य एवं चारा फसलें) डॉ. एस.के. प्रधान, भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. एच.एस. जाट, सिमिट (मेक्सिको) के डॉ. महेश गाथाला और डॉ. पी.एच. जैदी शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय पादप आनुवंशिकी संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली के विशेषज्ञ भी इसमें भाग लेंगे।

डॉ. चक्रवर्ती ने बताया कि मक्का देश की सबसे बहुउपयोगी फसलों में से एक है और अनाजों में तीसरे स्थान पर है। यह 1.2 करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई जाती है। इसका उपयोग चारा, पशु आहार, खाद्य, ऊर्जा और औद्योगिक कार्यों में होता है।

वर्तमान में भारत में मक्का का उपयोग मुख्य रूप से पोल्ट्री फीड (44 प्रतिशत), पशु आहार (11 प्रतिशत), बायोफ्यूल (18 प्रतिशत), स्टार्च (12 प्रतिशत) और प्रत्यक्ष एवं प्रसंस्कृत खाद्य (15 प्रतिशत) के रूप में किया जाता है। औद्योगिक उपयोग 85 प्रतिशत से अधिक होने के कारण पिछले पांच वर्षों में मक्का उत्पादन लगभग 6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 2024-25 में 43.41 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

यह कार्यशाला मक्का उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों के विकास के लिए नई दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

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