एनईपी पखवाड़ा : डीडीसी ने सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का किया निरीक्षण, गतिविधि आधारित शिक्षण पर दिया जोर

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एनईपी पखवाड़ा : डीडीसी ने सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का किया निरीक्षण, गतिविधि आधारित शिक्षण पर दिया जोर


एनईपी पखवाड़ा : डीडीसी ने सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का किया निरीक्षण, गतिविधि आधारित शिक्षण पर दिया जोर


रामगढ़, 01 जुलाई (हि.स.)। प्रोजेक्ट इंपैक्ट राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पखवाड़ा के तहत बुधवार को रामगढ़ के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) आशीष अग्रवाल ने गांधी मेमोरियल सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस एवं सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस गर्ल्स का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालयों में संचालित विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का जायजा लिया और विद्यालय प्रबंधन को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, नवाचार आधारित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के दौरान डीडीसी ने विद्यालय की विज्ञान, कंप्यूटर तथा अन्य प्रयोगशालाओं का भी अवलोकन किया। उन्होंने प्रयोगशालाओं में उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों एवं उनके उपयोग की समीक्षा करते हुए प्रयोगशालाओं के नियमित संचालन, विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रयोगात्मक शिक्षा विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और विषयों की बेहतर समझ के लिए अत्यंत आवश्यक है।

डीडीसी ने विद्यालय के विद्यार्थियों से भी संवाद किया और उनकी पढ़ाई, विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं, एनईपी पखवाड़ा के तहत आयोजित गतिविधियों तथा सीखने के अनुभवों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन, नवाचार और रचनात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को बेहतर बनाने का संदेश दिया।

इस अवसर पर उन्होंने शिक्षकों के साथ भी बैठक कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, विद्यार्थियों के समग्र विकास तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षकों को प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता और आवश्यकता के अनुरूप शिक्षण कार्य करने तथा विद्यालय में सकारात्मक, प्रेरणादायी और सीखने के अनुकूल शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के निर्देश दिए।

डीडीसी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ कौशल, रचनात्मकता और व्यावहारिक समझ का विकास करना है। इसके लिए विद्यालयों में गतिविधि-आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धति को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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