रजरप्पा मंदिर प्रक्षेत्र का होगा पुनर्विकास, बनेंगे प्रवेश द्वार, घाट और नई दुकानें

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रजरप्पा मंदिर प्रक्षेत्र का होगा पुनर्विकास, बनेंगे प्रवेश द्वार, घाट और नई दुकानें


रजरप्पा मंदिर प्रक्षेत्र का होगा पुनर्विकास, बनेंगे प्रवेश द्वार, घाट और नई दुकानें


रामगढ़, 25 अप्रैल (हि.स.)। रजरप्पा प्रक्षेत्र का सुव्यवस्थित तरीके से पुनर्विकास किया जाएगा। यहां भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण होगा, आकर्षक घाट बनाए जाएंगे और पूरे मंदिर परिसर में नई दुकानों की व्यवस्था की जाएगी। शनिवार को उपायुक्त (डीसी) ऋतुराज ने मां छिन्नमस्तिका सिद्ध पीठ रजरप्पा मंदिर परिसर पहुंचकर प्रस्तावित पुनर्विकास योजना की जानकारी दी।

मंदिर परिसर स्थित प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में दर्जा प्राप्त मंत्री फागू बेसरा, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य तथा संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान डीसी ने झारखंड उच्च न्यायालय से पारित आदेशों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी और रजरप्पा मंदिर परिसर में प्रस्तावित विकास योजनाओं की रूपरेखा साझा की।

उन्होंने आने वाले समय में किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार से चर्चा करते हुए मंदिर परिसर के विकास को लेकर संबंधित पक्षों से सुझाव भी लिए। इस दौरान मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों ने विभिन्न समस्याओं से भी प्रशासन को अवगत कराया।

बैठक के बाद डीसी ने रजरप्पा मंदिर परिसर का विस्तृत स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रस्तावित बस स्टैंड, प्रवेश द्वार (एंट्री गेट), निकास द्वार (एग्जिट गेट), घाट निर्माण, दुकानों के निर्माण सहित अन्य आधारभूत संरचनाओं के लिए चिन्हित स्थलों का जायजा लिया।

डीसी ऋतुराज ने कहा कि रजरप्पा मंदिर के पुनर्विकास कार्य को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर योजनाओं को धरातल पर उतारने का निर्देश दिया।

उन्होंने बताया कि झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर रजरप्पा मंदिर परिसर से अतिक्रमण हटाया गया है। जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि जिन दुकानों को हटाया गया है, उन्हें खाली स्थानों पर व्यवस्थित रूप से पुनर्स्थापित किया जाए। इसके लिए उपयुक्त स्थानों का चिन्हांकन किया जा रहा है।

डीसी ने कहा कि रजरप्पा मंदिर झारखंड का एक प्रमुख आस्था केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर के समुचित विकास, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।

मंदिर विकास कार्य के दौरान कई पेड़ों के कटने की संभावना को देखते हुए डीसी ने क्षतिपूर्ति वनीकरण (कंपनसेटरी अफॉरेस्टेशन) के तहत वन प्रमंडल पदाधिकारी, प्रभारी पदाधिकारी गोपनीय शाखा, अंचल अधिकारी, चितरपुर सहित अन्य अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखा जा सके।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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