ट्रांसपोर्ट नगर के मुआवजे से 2.25 करोड़ बिचौलिए के खाते में ट्रांसफर, डीसी ने दिए एफआईआर के निर्देश

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ट्रांसपोर्ट नगर के मुआवजे से 2.25 करोड़ बिचौलिए के खाते में ट्रांसफर, डीसी ने दिए एफआईआर के निर्देश


रांची, 03 नवंबर (हि.स.)। राजधानी रांची में कांके के सुकुरहुटू स्थित ट्रांसपोर्ट नगर के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के भुगतान में बड़ा खेल हुआ है। आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के एवज में रैयतों को मिली मुआवजा राशि का करीब 2.25 करोड़ रुपये बिचौलिए के माध्यम से वसूल लिया गया। इस मामले में जिला भू-अर्जन कार्यालय के कुछ कर्मियों और कथित बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत मिलने के बाद रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।

जानकारी के अनुसार सुकुरहुटू में ट्रांसपोर्ट नगर निर्माण के लिए दो खातों की कुल 73 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसके एवज में रैयतों को करीब 4 करोड़ 50 लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिए गए। आरोप है कि इस राशि का आधा हिस्सा यानी करीब 2 करोड़ 25 लाख रुपये कथित तौर पर कमीशन और रिश्वत के नाम पर वसूल लिया गया।

शिकायत के मुताबिक, कांके के जमीन कारोबारी और कथित बिचौलिए नुरूल होदा के माध्यम से यह रकम ली गई। आरोप है कि नुरूल होदा के एसबीआई कांके ब्लॉक शाखा स्थित खाता संख्या 45026420579 में रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए. आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष संजय महली ने इस मामले में रांची डीसी से शिकायत की है।

शिकायत में जिला भू-अर्जन कार्यालय के कर्मी नजीर अमित कुमार गुप्ता, अमीन राज कुमार महतो और लाल साहब की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। मोतीलाल पाहन, तेतरी देवी, झनकू पाहन और दृष्टिबाधित चंदुर पाहन ने भी अपनी शिकायत प्रशासन को सौंपी है।

मामले में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने स्पष्ट किया कि जिला भू-अर्जन कार्यालय की ओर से मुआवजे की राशि सीधे संबंधित रैयतों के बैंक खातों में भेजी गई है। रैयतों ने शिकायत में बताया है कि राशि मिलने के बाद एक व्यक्ति के खाते में कुछ पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए।

डीसी के अनुसार, बैंक प्रबंधक ने भी रैयतों से दूसरे व्यक्ति के खाते में रकम भेजने का कारण पूछा था, लेकिन रैयतों ने इसे अपना निजी मामला बताते हुए बैंक को हस्तक्षेप नहीं करने की बात कही थी। डीसी ने कहा कि फिलहाल यह रैयतों और तीसरे पक्ष के बीच हुआ निजी वित्तीय लेनदेन है।

हालांकि, रैयतों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। जिला भू-अर्जन कार्यालय भी अपने स्तर से पूरे मामले की जांच करेगा।

रांची डीसी ने लोगों से अपील की है कि जमीन अधिग्रहण या मुआवजे के भुगतान के नाम पर किसी भी व्यक्ति को पैसे नहीं दें। यदि कोई व्यक्ति सरकारी काम कराने के नाम पर पैसे मांगता है या किसी तरह की परेशानी उत्पन्न करता है, तो सीधे संबंधित अधिकारी या जिला प्रशासन से शिकायत करें। प्रशासन हर शिकायत सुनने और उसका यथासंभव समाधान करने के लिए तत्पर है। अब इस मामले में पुलिस की प्राथमिकी और जिला भू-अर्जन कार्यालय की जांच से यह स्पष्ट होगा कि मुआवजे की राशि मिलने के बाद हुए कथित लेनदेन के पीछे क्या कारण थे और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

Livevns.news Desk
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