मुखयमंत्री के दरवाजे पर बेहोश हुआ सिपाही, पत्रकार ने सीपीआर देकर बचाई जान

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मुखयमंत्री के दरवाजे पर बेहोश हुआ सिपाही, पत्रकार ने सीपीआर देकर बचाई जान


मुखयमंत्री के दरवाजे पर बेहोश हुआ सिपाही, पत्रकार ने सीपीआर देकर बचाई जान


रामगढ़, 08 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पूरा परिवार रूपी सोरेन के निधन के शोक में डूबा हुआ था। उनके अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षा भी चाक चौबंद थी। मुख्यमंत्री के आवास पर सुरक्षा में मौजूद हजारीबाग जिले का एक सिपाही आनंद कुमार ड्यूटी के दौरान ही बेहोश होकर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल चिकित्सीय सहायता नहीं मिली। तभी वहां मौजूद रामगढ़ जिले के एक वरीय पत्रकार अनिल विश्वकर्मा वहां पहुंचे और सीपीआर देकर उस सिपाही की खोई हुई सांसे चंद पलों में लौटा दी। सिपाही के मुंह और नाक से जब खून निकलने लगा तो वहां मौजूद सभी लोग सकते में पड़ गए। लेकिन अनिल विश्वकर्मा ने सीपीआर देना नहीं छोड़ा।

लगातार दिए गए सीपीआर ने सिपाही आनंद कुमार की सांसें उखड़ने नहीं दी। जब तक सीपीआर चलता रहा, तब तक रामगढ़ जिला प्रशासन ने आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था मुहैया कराई। एम्बुलेंस मुख्यमंत्री के आवास के पास पहुंचा और सिपाही आनंद कुमार को इलाज के लिए नजदीकी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने इलाज के बाद उसके बेहतर स्वास्थ होने की बात बताई।

रामगढ़ जिले में तत्कालीन डीसी फ़ैज़ अक अहमद मुमताज ने आपातकालीन सेवा के लिए एक बड़ी फौज तैयार की थी। उन्होंने रामगढ़ जिले में दो लाख लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिलवाया था। इसमें स्कूल, कॉलेज, पत्रकार और व्यवसाईयों तक को प्रशिक्षण दिया गया था। यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर लोगों को प्रशिक्षित किया गया था। उनकी ओर से चलाई गई मुहिम ने शहर से लेकर गांव तक एक ऐसी टीम बना दी है, जो आपातकालीन समय में अपने परिवार और पड़ोसियों की जान बचा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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