दूसरों की निंदा करना सर्वोत्तम पाप है : मुनिश्री शुभानंद जी

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दूसरों की निंदा करना सर्वोत्तम पाप है : मुनिश्री शुभानंद जी


दूसरों की निंदा करना सर्वोत्तम पाप है : मुनिश्री शुभानंद जी


रामगढ़, 17 जून (हि.स.)। शहर के मेन रोड स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री वसुनंदी के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री 108 पुण्यानंद जी और मुनिश्री 108 श्री शुभानंद जी का मंगल प्रवास चल रहा है।

बुधवार को प्रवास के क्रम में मुनियों की ओर से प्रतिदिन मंगल प्रवचन दिया जा रहा है। इसी क्रम में मुनिश्री ने कहा कि पाप के कई प्रकार होते हैं। इनमें लोभ, माया, हिंसा, दुराचार, परस्त्री गमन शामिल हैं। पाप के कई रूप होते हैं, यूं तो किसी भी प्रकार का पाप करना अपनी आत्मा को कष्ट पहुंचाना होता है, लेकिन इन सबसे अधिक गहरा पाप परनिंदा होती है। परनिंदा करने वाला स्वयं तो पाप का भागी होता ही वह दूसरों की आत्मा को भी संताप पहुंचाता है।

इसके अलावा मुनिश्री अपने प्रवचनों के माध्यम से भक्तों को आत्मशुद्धि की ओर अग्रसर कर रहे हैं। मुनिश्री के मंगल प्रवास के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए जैन समाज के सचिव योगेश सेठी ने बताया कि मुनि संघ के आगमन से रामगढ़ की धरा पवित्र हो रही है, और रामगढ़ जैन समाज में हर्ष का वातावरण व्याप्त है।

इस अवसर पर ललित चूड़ीवाल, जैन समाज के मीडिया प्रभारी श्रवण जैन, पदम जैन, राहुल पाटनी, राजेश जैन, उषा अजमेरा, प्रेम काला, प्रिया पाटनी, पुष्पा सेठी, श्वेता अजमेरा, माया जैन, कुसुम पाटनी, अनीता चूड़ीवाल, सुनीता चूड़ीवाल, रेखा कुसुम जैन शामिल थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में महिला सदस्य मुनि संघ की आहारचर्या को सफल बना रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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