नागपुरी फिल्म विवाद पर अनुसूचित जनजाति आयोग ने मांगी रिपोर्ट
रांची, 19 जून (हि.स.)।
नागपुरी फिल्म सेरेंग को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है। यह जानकारी केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने शुक्रवार को गंगा आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि केन्द्रीय सरना समिति ने नागपुरी फिल्म सेरेंग और कुछ नागपुरी एल्बमों में कथित अश्लीलता और आदिवासी समाज के चित्रण को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। बकायदा 23 मई 2026 को समिति के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ आशा लकड़ा को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है।
उन्होंने दोबारा समिति ने फिल्म के निर्माता, निर्देशक और संबंधित कलाकारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई एवं फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। बब्लू मुंडा ने कहा कि फिल्म में एक मुस्लिम युवक और मुंडा युवती के प्रेम प्रसंग और धर्म परिवर्तन के बाद विवाह को दिखाया गया है, जिससे लव जिहाद और धर्म परिवर्तन को बढ़ावा मिलने का आरोप है। उन्होंने दावा किया कि फिल्म में उरांव और मुंडा समुदाय के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की गई हैं। इसलिए आयोग की यह पहल सकारात्मिक कदम है।
मौके पर मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने फिल्म निर्माताओं से आदिवासी धर्म, संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करने की अपील की। प्रेस वार्ता में अशोक मुंडा, महादेव टोप्पो, जगन्नाथ तिर्की, संदीप उरांव, अनीता गाड़ी, सुरेंद्र लिंडा, आकाश मुंडा और विशाल मुंडा सहित अन्य मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

