मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की जनगणना-2027 में सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग, राष्ट्रपति को लिखा पत्र
रांची, 03 मई (हि.स.)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2027 की जनगणना में आदिवासी समाज के लिए सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग उठाई है। मुख्यमंत्री ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर सरना धर्म के लिए अलग कोड निर्धारित करने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि झारखंड सरकार जनगणना अभियान में पूरा सहयोग कर रही है और उन्होंने स्वयं भी स्व-गणना कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के संतुलित और समावेशी विकास के लिए तथ्य आधारित नीतियां जरूरी होती हैं, जिसके लिए सटीक आंकड़ों का संग्रह बेहद महत्वपूर्ण है।
आदिवासी समाज की पहचान पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समुदाय की अपनी विशिष्ट सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। प्रकृति पूजा, सरना स्थल, कुल देवता और ग्राम देवता की मान्यताएं इसे अन्य धर्मों से अलग एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2011 की जनगणना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय अलग कोड नहीं होने के बावजूद देश के 21 राज्यों में लगभग 50 लाख लोगों ने अपने धर्म के रूप में सरना का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य का गठन भी आदिवासी पहचान के आधार पर हुआ है और यहां की नीतियां इसी दृष्टिकोण पर आधारित हैं।
संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए उन्होंने अनुच्छेद 244, 338ए, 339 और 275 का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को आदिवासी समाज का संरक्षक बताते हुए इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि जनगणना के दूसरे चरण के फॉर्म में सरना धर्म के लिए अलग कोड सुनिश्चित किया जाए, ताकि आदिवासी समुदाय की धार्मिक पहचान सुरक्षित और संरक्षित रह सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

