सीएनआई चर्च पर गरीब परिवार की जमीन हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने का आरोप

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सीएनआई चर्च पर गरीब परिवार की जमीन हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने का आरोप


रामगढ़, 07 सितंबर (हि.स.)। रामगढ़ शहर की 3.32 एकड़ जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। राजेश धान ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर उनके परिवार की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि मामले में राजस्व एवं न्यायालय से जुड़े विभिन्न आदेश उनके पक्ष में हैं।

राजेश धान के अनुसार रामगढ़ अंचल के खाता संख्या 298, प्लॉट संख्या 457, 459, 460 एवं 461, कुल रकबा 3.32 एकड़, अंचल के पंजी-II में वॉल्यूम संख्या 44, पृष्ठ 180 पर डीयू मिशन और ओबे धान के नाम दर्ज है। उनका आरोप है कि सीएनआई चर्च की ओर से उक्त जमीन में 02 एकड़ 86 डिसमिल को लेकर एक दस्तावेज डीसी और एलआरडीसी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, जिसे उन्होंने फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि विविध अपील वाद और उपायुक्त न्यायालय में चले विविध रिवीजन वाद में प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर न्यायिक प्रक्रिया के बाद ओबे धान के नाम जमाबंदी कायम की गई।

राजेश धान ने शहर में निकाले गए मौन जुलूस को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें शामिल बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं को जमीन से जुड़े न्यायालयी और राजस्व दस्तावेजों की पूरी जानकारी नहीं दी गई। उनका आरोप है कि चर्च के पादरी और समाज के कई लोगों को भी उनके परिवार के पक्ष में आए न्यायालयीन आदेशों की जानकारी नहीं दी गई।

उन्होंने कहा कि 02 सितंबर 2026 को उनका परिवार अपनी जमीन की साफ-सफाई करा रहा था। वहां न तो कोई निर्माण कार्य किया गया और न ही ट्रेंच काटा गया। उनके अनुसार परिसर में उगी झाड़ियों की जेसीबी से सफाई कराई गई थी।

राजेश धान ने बताया कि टाइटल सूट और उससे संबंधित न्यायालयीन आदेशों के आधार पर दखल-दिहानी की प्रक्रिया पूरी की गई। उनके अनुसार 17 मार्च 2026 के व्यवहार न्यायालय, रामगढ़ के आदेश के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी ने अंचल अधिकारी को दंडाधिकारी नियुक्त किया।

उन्होंने दावा किया कि 08 अप्रैल 2026 को न्यायालय से आए कर्मचारियों की मौजूदगी में दखल-दिहानी की कार्रवाई पूरी हुई और जमीन की मापी की गई। इसी दौरान गोवर्धन पाठक के वंशजों को न्यायालय के निर्देश पर प्लॉट संख्या 460 में 10 डिसमिल, 461 में 2 डिसमिल, 457 में 3 डिसमिल और 459 में 13 डिसमिल जमीन की मापी कर सुपुर्द किए जाने की बात कही गई है।

राजेश धान ने कहा कि उनका परिवार आर्थिक रूप से बदहाल है और वे स्वयं ईसाई धर्म को अपने पूर्वजों से मानते आ रहे हैं। इसके बावजूद उनका आरोप है कि पिछले 16 वर्षों से भू-माफिया और जमीन दलालों के माध्यम से उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने सीएनआई चर्च से जुड़े लोगों पर आरोप लगाया कि उनकी जमीन को लेकर रांची के एक बिल्डर के नाम बिक्री का एग्रीमेंट तैयार किया गया और विभिन्न सरकारी कार्यालयों में गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर उनके खिलाफ साजिश रची गई। उन्होंने रामगढ़ छावनी परिषद कार्यालय में भी गलत जानकारी देकर नक्शा पास कराने के प्रयास का आरोप लगाया।

राजेश धान ने सीएनआई चर्च के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें डीयू मिशन और ओबे धान की संयुक्त रजिस्ट्री संख्या का हवाला दिए जाने की बात कही गई है। उनका कहना है कि डीयू मिशन की संपत्ति कभी सीएनआई चर्च को हस्तांतरित नहीं हुई।

उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता के बाद डीयू मिशन से जुड़े लोगों के भारत छोड़ने के बावजूद उनकी संपत्ति सीएनआई चर्च को हस्तांतरित किए जाने का कोई वैध दस्तावेज मौजूद नहीं है। राजेश धान ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर न्यायालयीय एवं राजस्व अभिलेखों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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