गांव में भालू का खेल दिखा रहा मदारी वन विभाग के पहुंचते ही हुआ फरार

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गांव में भालू का खेल दिखा रहा मदारी वन विभाग के पहुंचते ही हुआ फरार


दुमका, 06 जून (हि.स.)। एक-दो दशक पहले तक मदारी वन्य जीव भालू का खेल गली-मुहल्ले में दिखाते नजर आते थे। जब से सरकार की सख्ती बढ़ी तो भालू का खेल दिखना बंद हो गया। लेकिन आज भी चोरी-छुपे ग्रामीण इलाकों में यह जारी है। इसका उदाहरण दुमका में देखने को मिला, जब शिकारीपाड़ा प्रखंड के एक गांव में मदारी भालू को लेकर पहुंचा था।

जब उसे पता चला कि वन विभाग की टीम आने वाली है तो वह भालू को एक पेड़ से बांधकर भाग निकला। फिलहाल भालू को वन विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है और उसे दुमका वन क्षेत्र के डिपो में रखा गया है।

जिला के शिकारीपाड़ा प्रखंड के मंझलाडीह गांव में ग्रामीणों ने देखा कि नुरुल नाम का एक मदारी अपने दो जमूरे के साथ एक विशाल भालू को लेकर घूम रहा है। कहीं-कहीं रुक कर वह भालू का खेल भी दिख रहा था। इसी बीच किसी ने यह सूचना वन विभाग को दे दी। जानकारी पाकर वन विभाग की टीम मंझलाडीह गांव के लिए रवाना हो गई, लेकिन इस बीच मदारी और उसके साथियों को यह भनक लग गई की वन विभाग की टीम आ रही है। उन्होंने फौरन भालू को एक पेड़ से बांध दिया और मौके से फरार हो गए।

इधर, शिकारीपाड़ा के वन अधिकारी तारणी मंडल जब मौके पर पहुंचे तो भालू को पेड़ से बंधा पाया। इसकी सूचना वरीय अधिकारी को देने पर दुमका से एक बड़ा पिंजरा गांव भेजा गया। इधर, पिंजरा देख भालू काफी उग्र हो गया। उसे पिंजरे में डालने में चार से पांच घंटे का समय लग गया। फिलहाल इसे दुमका के वन विभाग के डिपो में लाकर रखा गया है।

साथ ही उस मदारी के ऊपर मामला दर्ज करने की तैयारी चल रही है।

इस पूरे मामले पर शिकारीपाड़ा प्रखंड के वन विभाग अधिकारी तारणी मंडल ने बताया कि काफी मशक्कत के बाद भालू को पिंजरे में डाला जा सका। उन्होंने कहा कि इसकी सूचना वाइल्डलाइफ ऑफिसर को भेजी गई है। उनके निर्देशानुसार बहुत जल्द इस भालू को किसी चिड़ियाखाना या उपयुक्त स्थान पर भेजा जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / नीरज कुमार

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