14वीं जेपीएससी परीक्षा विवाद : बाबूलाल मरांडी ने की सीबीआई जांच की मांग, राज्य सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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14वीं जेपीएससी परीक्षा विवाद : बाबूलाल मरांडी ने की सीबीआई जांच की मांग, राज्य सरकार पर लगाए गंभीर आरोप


14वीं जेपीएससी परीक्षा विवाद : बाबूलाल मरांडी ने की सीबीआई जांच की मांग, राज्य सरकार पर लगाए गंभीर आरोप


14वीं जेपीएससी परीक्षा विवाद : बाबूलाल मरांडी ने की सीबीआई जांच की मांग, राज्य सरकार पर लगाए गंभीर आरोप


रांची, 26 जुलाई (हि.स.)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सीआईडी जांच के माध्यम से पूरे मामले की लीपापोती करने का प्रयास कर रही है और वास्तविक दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल इसकी अनुशंसा करने की अपील की।

रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में मरांडी ने दावा किया कि झारखंड में सरकारी अधिकारी बनने के लिए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार प्रारंभिक (पीटी) परीक्षा पास कराने के लिए पांच लाख रुपये, मुख्य परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए 25 लाख रुपये तथा साक्षात्कार में चयन सुनिश्चित कराने के लिए 10 लाख रुपये तक की रिश्वत ली जा रही है। उनके अनुसार इस तरह एक अभ्यर्थी से कुल 40 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया।

मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण संस्थानों में भ्रष्ट और अयोग्य अधिकारियों की नियुक्ति कर रखी है। उन्होंने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के एक अधिकारी तथा जेपीएससी के पूर्व मुख्य परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार का नाम लेते हुए उन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस संस्थान से राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों का चयन होता है, यदि वही भ्रष्टाचार से प्रभावित होगा तो झारखंड को ईमानदार और सक्षम अधिकारी नहीं मिल सकेंगे।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा संस्थान है। यदि इसकी चयन प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में रहेगी तो शासन-प्रशासन की पूरी व्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखती है, जिनकी कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं।

मरांडी ने कहा कि सरकार द्वारा सीआईडी जांच की घोषणा केवल दिखावटी कार्रवाई है। उनका आरोप था कि इस जांच का उद्देश्य सच्चाई सामने लाना नहीं, बल्कि कथित घोटाले के सबूतों को मिटाना है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हैं तो उन्हें सीबीआई जांच से कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, यह केवल परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर अपराध है। यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका उजागर हो सकती है।

नेता प्रतिपक्ष ने सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक मनोज कौशिक की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सरकार ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप रखी हैं और उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए।

मरांडी ने कहा कि सीआईडी छात्रों को न्याय दिलाने के बजाय कथित तौर पर उन लोगों को बचाने का माध्यम बन रही है, जिन्होंने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।

मरांडी ने दावा किया कि कर्नाटक के एक छात्र ने जनवरी माह में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को पत्र लिखकर ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी और टीडीएल के एक कर्मचारी अभय तिवारी की भूमिका की जानकारी दी थी। इसके अलावा रेंज अफसर भर्ती परीक्षा में भी अनियमितताओं की सूचना उन्हें पहले से थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफा देना पर्याप्त नहीं है। यदि लापरवाही या अनियमितता हुई है तो तत्कालीन अध्यक्ष के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

मरांडी ने कहा कि इससे पहले जेएसएससी सीजीएल परीक्षा की जांच भी सीआईडी से कराई गई थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की लगभग हर भर्ती परीक्षा विवादों में रही है और सरकारी नौकरियों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं का सरकार पर से विश्वास उठता जा रहा है और यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।

मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में नौकरियां खुलेआम बेची जा रही हैं और यह सब राज्य सरकार के संरक्षण में हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य लगातार प्रभावित होता रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि बिना किसी विलंब के पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए, ताकि दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और युवाओं का भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास बहाल हो।

प्रेसवार्ता में भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी उपस्थित थीं।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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