बाल विवाह से मुक्ति के लिए चलाया गया जागरुकता अभियान

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बाल विवाह से मुक्ति के लिए चलाया गया जागरुकता अभियान


बाल विवाह से मुक्ति के लिए चलाया गया जागरुकता अभियान


रामगढ़, 26 फ़रवरी (हि.स.) । रामगढ़ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में गुरुवार को बाल विवाह से मुक्ति के लिए चलाए जा रहे आशा अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के द्वारा चलाए जा रहे आशा अभियान को लेकर लोगों को बाल विवाह को खत्म करने के प्रति जागरूक किया गया। अभियान की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कुमार ने की। उन्होंने बताया कि आशा अभियान का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह से पूर्णतः मुक्ति है। इस कार्यक्रम में एलएडीसी उपाध्यक्ष रामजी गुप्ता ने कहा कि बच्चे हमारे भविष्य की नींव हैं। भारत में दुनिया के लगभग 19 प्रतिशत बच्चे रहते हैं। उनके अधिकारों की रक्षा केवल एक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि एक बेहतर भविष्य के लिए अनिवार्यता बन जाती है।

बाल दुल्हन वाला सबसे बड़ा देश है भारत

रामजी गुप्ता ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बच्चे कई चुनौतियों का सामना करते हैं। जिनमें से एक प्रमुख चुनौती बाल विवाह की समस्या है। भारत में बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक समस्या होने के साथ-साथ एक अपराध भी है। एक प्रमुख वैश्विक एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की एक तिहाई बाल दुल्हन भारत में हैं। जिससे यह बचपन में विवाह करने वाली लड़कियों की सबसे अधिक संख्या वाला देश बन जाता है। बाल विवाह बच्चों के स्वास्थ्य और भलाई पर गंभीर प्रभाव डालता है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार आशा अभियान बाल विवाह की समस्या से निपटने के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार करने का लक्ष्य रखता है। यह एक मानकीकृत, प्रभावी और कानूनी रूप से मजबूत दृष्टिकोण स्थापित करता है। बाल विवाह की रोकथाम बच्चों के अधिकारों की रक्षा और समुदायों के भीतर जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चल रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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