अंश और अंशिका 12 दिनों से सो रहे थे पुआल के बिस्तर पर
रामगढ़, 14 जनवरी (हि.स.)। रांची के धुर्वा इलाके से लापता बच्चे सड़क पर फेरी लगाने वाले एक दंपत्ति के पास मिले, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। सूर्या और उसकी पत्नी सोनम उर्फ सोनी जिन दो बच्चों को लेकर रामगढ़ के ग्रामीण इलाके में छुपे हुए थे, उन बच्चों की तलाश पूरे झारखंड की पुलिस कई राज्यों में हो रही थी। रामगढ़ एसपी अजय कुमार जब सूर्या और उसकी पत्नी सोनम को लेकर किराए के उस मकान में पहुंचे तो अंदर का नजारा ही कुछ और था। पिछले 12 दिनों से अंश और अंशिका को पुआल के बिस्तर पर सुलाया जा रहा था।
मकान मालकिन ने सुनाई पूरी कहानी
सूर्या और सोनम की मकान मालकिन रोशन आरा ने पूरी कहानी पुलिस के समक्ष बयान की है। इस दंपत्ति ने दोनों बच्चों को मम्मी और पापा कहना सिखा दिया था। जिस तरीके से बच्चों से घुले मिले थे, बाहरी लोगों को किसी प्रकार का शक भी नहीं हो रहा था। सूर्या और सोनम उर्फ सोनी ने बच्चों के साथ खुद को छुपाने के लिए रजरप्पा थाने के चितरपुर प्रखंड अंतर्गत जाने बस्ती के स्लम एरिया को चुना। यहां उसे 1000 रुपए प्रति महीने पर रोशन आरा के मकान में शरण मिल गई। सूर्या हर दिन फेरी लगाकर बर्तन बेचता था और शाम को घर लौटता था। कई बार उसकी पत्नी सोनम उर्फ सोनी भी काम पर बाहर चली जाती थी। जब घर लौटी थी तो बच्चे भी उसके साथ चिपक जाते थे। जब सूर्या और सोनम घर में नहीं होते थे, तो रोशन आरा के घर में ही अंश और अंशिका खेलते थे।
सूटकेस में ढेरों आधार कार्ड के साथ मिले बच्ची के कपड़े
एसपी अजय कुमार जब सूर्या और सोनम को लेकर उनके किराए के कमरे में घुसे तो एक सूटकेस मिला। एसपी ने जब सूटकेस को खोला तो उसमें बच्ची के कपड़े के साथ-साथ ढेर सारे आधार कार्ड भी मिले। विभिन्न जाति के नाम से बने इस आधार कार्ड का इस्तेमाल कहां-कहां किया जाता था, इसकी जांच शुरू कर दी गई है। इसके अलावा रोशन आरा के घर से भी कई दस्तावेज पुलिस को मिले हैं। पुलिस उन सारे दस्तावेज को जब्त कर थाने ले गई है। सभी की जांच होगी और उसके बाद पूरा खुलासा होगा।
बिहार में चले अतिक्रमण अभियान का सूर्या ने बनाया बहाना
रोशन आरा ने बताया कि सूर्या खुद को मूल रूप से बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला निवासी बता रहा था। उसकी पत्नी सोनम का मायका रामगढ़ जिले के कोठार गांव में ही है। जब किराए के लिए कमरा ढूंढने वे लोग पहुंचे तो बताया कि बिहार में चले अतिक्रमण अभियान में उनके घर तोड़ दिए गए हैं। उनके पास रहने के लिए छत नहीं है। बच्चों का मुंह देखकर रोशन आरा ने उन्हें 1000 रुपए प्रति महीने पर कमरा दे दिया। उसने रुपए भी महीना पूरा होने पर देने की बात कही थी। लेकिन दूसरे के बच्चे को छुपाने के लिए रोशन आरा का घर इस्तेमाल होगा, इसका अंदाजा उन्हें नहीं था।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

