गोड्डा में अदाणी फाउंडेशन ने बदली लोगों की जिंदगी, मिलने लगी सुविधाएं

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गोड्डा में अदाणी फाउंडेशन ने बदली लोगों की जिंदगी, मिलने लगी सुविधाएं


गोड्डा, 15 जून (हि.स.)। गोड्डा के मोतिया गांव में रहने वाली 60 साल की फदमा देवी के लिए आंखों की रोशनी जाना जीवन रुक जाने जैसा था। आर्थिक तंगी के कारण इलाज असंभव लग रहा था। गांव में लगे आंखों के स्वास्थ्य शिविर में जांच के बाद उन्हें मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए रेफर किया गया। 50 हजार रुपए में होने वाला पूरा इलाज मुफ्त में हुआ। आज फदमा देवी फिर से साफ देख सकती हैं। ऐसा ही मामला लोबांधा गांव के 80 साल के प्रसादी यादव का है। बरसों से जोड़ों के दर्द और दूसरी समस्याओं से जूझ रहे थे। दूर सदर अस्पताल जाना उनके लिए बेहद कठिन था। एमएचसीयू में नियमित परामर्श और दवाइयों से उनकी स्थिति में सुधार हुआ। आज वे फिर से गांव में सक्रिय जीवन जी पा रहे हैं। ये कहांनियां बताती हैं कि कैसे किसी कंपनी के छोटे से प्रयास से लोगों की जिंदगी में बड़े सुधार आ सकता है।

राज्य के गोड्डा ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार तक आम लोगों की पहुंच लंबे समय तक एक बड़ी चुनौती रही है। ज़िले की 60 फीसदी से अधिक आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है। ऐसे हालात में गोड्डा थर्मल पावर प्रोजेक्ट क्षेत्र में अदाणी फाउंडेशन और अदाणी पावर गोड्डा की पहल ने ज़मीनी स्तर पर बड़ा बदलाव शुरू किया है।

इलाज को अस्पताल तक सीमित रखने के बजाय, अदाणी फाउंडेशन ने अस्पताल को ही गांवों तक पहुंचाने का मॉडल अपनाया है। चार मोबाइल हेल्थ केयर यूनिट्स के ज़रिए गोड्डा और साहिबगंज के कुल 137 गांवों में नियमित चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं।

साल 2025-26 में इन मोबाइल यूनिट्स के माध्यम से 74,116 मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही। इन यूनिट्स में नियमित स्वास्थ्य जांच, मुफ्त दवाइयां और गंभीर मरीजों के लिए 24 घंटे एम्बुलेंस सेवा भी शामिल है। खास बात यह है कि कुछ यूनिट्स सीधे अदाणी फाउंडेशन की ओर से संचालित हैं, जबकि अन्य अनुभवी सामाजिक संस्था हेल्पएज इंडिया के सहयोग से चलाई जा रही हैं। इससे सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों सुनिश्चित हो सकी हैं।

सिर्फ सामान्य इलाज ही नहीं, बल्कि एक्सपर्ट डॉक्टरी सहायता भी अब गोड्डा के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रही है। मोतिया स्थित कम्युनिटी सेंटर में हर महीने और पखवाड़े में विशेषज्ञ डॉक्टरों के शिविर लगाए जाते हैं। स्त्री रोग, बाल रोग, हृदय, आंख और हड्डी रोग जैसे विषयों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की ओर से 108 स्वास्थ्य शिविरों के ज़रिए 2,415 से अधिक मरीजों को परामर्श, मुफ्त दवाइयां और जांच सुविधाएं दी गईं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की रही, जो ग्रामीण स्वास्थ्य की वास्तविक ज़रूरत को दर्शाती है।

टीबी जैसी गंभीर बीमारी सिर्फ दवा से नहीं, पोषण से भी जुड़ी होती है। इसी सोच के साथ अदाणी फाउंडेशन ने निक्षय मित्र कार्यक्रम के तहत गोड्डा और पोड़ैयाहाट के 300 टीबी मरीजों को छह महीने तक पोषण किट उपलब्ध कराई। यह वितरण जिला प्रशासन की मौजूदगी में किया गया, जिससे सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ सामाजिक सहभागिता का मजबूत उदाहरण सामने आया। इस पहल ने टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को ज़मीनी मजबूती दी है।

हिन्दुस्थान समाचार / रंजीत कुमार

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