आचार्य अपने संस्कारों और आदर्श आचरण से समाज को करता है संस्कारित : गोपाल

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आचार्य अपने संस्कारों और आदर्श आचरण से समाज को करता है संस्कारित : गोपाल


आचार्य अपने संस्कारों और आदर्श आचरण से समाज को करता है संस्कारित : गोपाल


रांची, 13 जून (हि.स.)। विद्या भारती, झारखंड (विद्या विकास समिति, झारखंड वनांचल शिक्षा समिति एवं जनजातीय शिक्षा समिति) की ओर से आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग, स्थायित्व आचार्य प्रशिक्षण वर्ग और कार्यालय कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग का समापन शनिवार को हुआ।

रांची के कुदलुम स्थित श्री कृष्णचंद्र गांधी शैक्षिक नगर में आयोजित प्रशिक्षण वर्ग में राज्यभर से लगभग 500 आचार्यों ने हिस्सा लिया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झारखंड प्रांत के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने आचार्य के दायित्व और गुणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य केवल शिक्षा देने वाला नहीं, बल्कि समाज का नेतृत्व करने वाला होता है। वह अपने संस्कारों, सद्गुणों और आदर्श आचरण से समाज को संस्कारित बनाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि आचार्य को केवल विषय ज्ञान ही नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का भी उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उसकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि करुणा, दया, निस्वार्थ सेवा और श्रेष्ठ आचरण के माध्यम से आचार्य समाज को दिशा देता है। वह विद्यार्थियों में राष्ट्रहित, समाजहित और देशभक्ति की भावना का विकास करता है एवं उन्हें अपसंस्कृति से दूर रखने का प्रयास करता है। आज विश्व की अनेक शक्तियां भारत की पारिवारिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन भारतीय समाज सर्वे भवन्तु सुखिनः और वसुधैव कुटुम्बकम् के आदर्शों में विश्वास करता है। भारत में मातृशक्ति का सम्मान और पूजा की परंपरा है। यहां विद्या की देवी सरस्वती, धन की देवी लक्ष्मी और शक्ति की देवी दुर्गा की आराधना की जाती है। भारतीय संस्कृति प्रकृति, गौवंश, वृक्षों, नदियों और जलस्रोतों के प्रति भी श्रद्धा का भाव रखती है।

इस अवसर पर विद्या भारती के सचिव नकुल कुमार शर्मा ने प्रशिक्षण वर्ग की रूपरेखा और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मौके पर समारोह की अध्यक्षता करते हुए रामअवतार नारसरिया ने कहा कि शिक्षण कार्य ईश्वरीय कार्य है। विद्या भारती से जुड़े आचार्य स्वेच्छा से राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्या भारती एक शैक्षिक आंदोलन है, जो पंचकोशीय और पंचपदी शिक्षा पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का कार्य कर रही है। लगभग 75 वर्षों से संगठन इसी दिशा में निरंतर कार्यरत है।

उन्होंने कहा कि देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है, लेकिन वर्तमान समय में सामाजिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियां भी विद्यमान हैं। ऐसे में आचार्यों का दायित्व है कि वे राष्ट्र प्रथम की भावना से विद्यार्थियों का निर्माण करें और भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम का संचालन विभाग निरीक्षक अखिलेश कुमार ने किया। वंदे मातरम् के साथ समारोह का समापन हुआ।

इस अवसर पर क्षेत्र संगठन मंत्री ख्यालीराम, विद्या विकास समिति, झारखंड के कोषाध्यक्ष विष्णु जालान तथा सह मंत्री डॉ पूजा, मनोज भारद्वाज, तुलसी ठाकुर, विवेक नयन पांडे और नीरज कुमार लाल सहित अन्य उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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