रामगढ़ में 25 हजार लोगों ने एक साथ गाया वंदेमातरम

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रामगढ़ में 25 हजार लोगों ने एक साथ गाया वंदेमातरम


रामगढ़ में 25 हजार लोगों ने एक साथ गाया वंदेमातरम


रामगढ़, 25 सितंबर (हि.स.)। वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विद्या भारती के आह्वान पर रामगढ़ में आयोजित ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को रामगढ़ जिले में एक साथ, एक लय और एक स्वर में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया।

जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं प्रमुख स्थानों पर हजारों लोगों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन कर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

रामप्रसाद चंद्रभान सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की ओर से इस आयोजन को लेकर पिछले कई दिनों से व्यापक तैयारियां की जा रही थीं। विद्यालय परिवार के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न विद्यालयों, अभिभावकों, पूर्व छात्रों और समाज के लोगों को कार्यक्रम से जोड़ने के लिए संपर्क अभियान चलाया गया। इसके परिणामस्वरूप जिले में लगभग 25 हजार लोगों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया। आयोजन में जिले के 27 विद्यालयों के छात्र, शिक्षक सहित अन्य उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

विद्यालय प्रबंधन समिति के सचिव शंकर लाल अग्रवाल ने कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वंदे मातरम् भारत की राष्ट्रीय चेतना और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। इसके 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में एक साथ सामूहिक गायन का आयोजन गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ जिले में 25 हजार लोगों की सहभागिता समाज में राष्ट्रभावना के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय परिवार, अभिभावकों, पूर्व छात्रों एवं समाज के सभी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रवीण ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण की भावना का स्वर है। 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पूरे देश के साथ रामगढ़ में भी हजारों लोगों का एक साथ वंदे मातरम् गाना गौरव का विषय है। जिले के 27 विद्यालयों के माध्यम से लगभग 25 हजार लोगों को इस अभियान से जोड़ना सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

प्रधानाचार्य ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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