(अपडेट) उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा मामले में 164 गिरफ्तार

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(अपडेट) उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा मामले में 164 गिरफ्तार


रांची, 12 अप्रैल (हि.स.)। उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियों के मामले में रांची पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 164 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के अध्यक्ष प्रशांत कुमार, रांची उपायुक्त (डीसी) मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन ने रविवार को संयुक्त प्रेस वार्ता कर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब तक पेपर लीक का कोई ठोस प्रमाण तो नहीं मिला है, लेकिन संगठित सोल्वर और पेपर लीक गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी है।

प्रेस वार्ता के दौरान बताया गया कि गिरफ्तार 159 अभ्यर्थियों में मुख्य रूप से बिहार के पटना जिले के निवासी विकास कुमार (41), जहानाबाद के रहने वाले अतुल वत्स (38) के अलावा झारखंड में रामगढ़ जिले के मांडू निवासी आशीष कुमार (37), योगेश प्रसाद (34), मुकेश कुमार (32) और रमीज़ अंसारी (34) शामिल हैं।

आरोपितों के पास चार अलग-अलग सेट के प्रश्न पत्र मिले थे, जिनमें से केवल चार सवाल ही वास्तविक परीक्षा से मेल खाते पाए गए। 120 प्रश्नों में महज चार के मिलान के आधार पर पेपर लीक की पुष्टि नहीं की जा सकती। हालांकि मामले की गहराई से जांच जारी है।

पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में अंतरराज्यीय सोल्वर/पेपर लीक गैंग के सरगना अतुल वत्स सहित पांच मुख्य आरोपितों की पहचान की गई है, जो बिहार के रहने वाले हैं। यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली कराने में सक्रिय रहा है।

घटना की शुरुआत 11 अप्रैल 2026 को मिली एक गुप्त सूचना से हुई, जिसमें तमाड़ थाना क्षेत्र के एक अर्द्धनिर्मित भवन में 150 से अधिक जेएसएससी अभ्यर्थियों के जमा होने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दी गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष छापेमारी दल का गठन कर देर रात कार्रवाई की।

छापेमारी के दौरान मौके पर भारी संख्या में वाहन खड़े मिले। पुलिस टीम के पहुंचते ही कई युवक भागने लगे और अपने पास मौजूद सामान को छिपाने या नष्ट करने की कोशिश करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करते हुए पुलिस ने सभी को दो कमरों में सीमित कर तलाशी अभियान चलाया।

पुलिस की प्राथमिक जांच में कुल 164 लोगों की मौजूदगी पाई गई, जिनमें 159 अभ्यर्थी (7 महिलाएं) और पांच गैंग के सदस्य शामिल थे। तलाशी के दौरान प्रिंटर, प्रश्न-उत्तर के तैयार सेट, फटे हुए एडमिट कार्ड, संदिग्ध मोबाइल फोन और बैंक चेक बरामद किए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्न और उनके उत्तर रटवा रहे थे। इसके बदले अभ्यर्थियों से 10 से 15 लाख रुपये तक वसूले जा रहे थे। कई अभ्यर्थियों ने अपने मोबाइल फोन, एडमिट कार्ड और बैंक चेक तक गिरोह को सौंप दिए थे, ताकि पुलिस से बचा जा सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तमाड़ थाना कांड संख्या-21/26 दिनांक 12 अप्रैल 2026 को दर्ज कर सभी 164 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने मौके से आठ वाहनों को भी जब्त किया है।

पुलिस ने यह भी बताया कि मुख्य सरगना अतुल वत्स का आपराधिक इतिहास काफी लंबा और पुराना है और वह राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा 2017, नीट पेपर लीक 2024, बिहार कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती 2024, उत्तर प्रदेश समीक्षा अधिकारी परीक्षा 2024 और यूपी सिपाही भर्ती परीक्षा 2024 जैसे मामलों में भी संलिप्त रहा है।

पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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