रांची में दुर्गोत्सव संपन्न, 176 पूजा पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन
रांची, 21 अक्टूबर (हि.स.)। राजधानी रांची में भक्ति और आस्था के संगम के बीच दुर्गोत्सव का बुधवार को समापन हो गया। विभिन्न पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का शहर के तालाबों में विसर्जन किया गया। इससे पहले पूजा समितियों की ओर से विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालु मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाओं को वाहनों में लेकर नाचते-गाते बड़ा तालाब, चडरी तालाब, अरगोड़ा तालाब, जगन्नाथ तालाब सहित अन्य जलाशयों तक पहुंचे।
दुर्गा पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा और अन्य प्रतिमाओं को तालाबों में विसर्जन को लेकर जिला प्रशासन की ओर से एनडीआरएफ टीम तैनात किए गए थे। प्रतिमा विसर्जन करने वाले लोगों पर प्रशासन की पैनी नजर थी। इसके अलावा नगर निगम की टीम भी तैनात रही। मूर्तियों को तालाब से बाहर निकालने के लिए नगर निगम हमेशा अलर्ट रही। तालाब को साफ बनाए रखने के लिए सफाई कर्मी भी मौजूद रहे।
यहां भक्तों के जरिये सभी प्रतिमाओं की सामूहिक रूप से प्रार्थना की गई। देवी-देवताओं को आरती उतारी गई। फूल माला पहनाई गई। भजन एवं भक्ति गीत गाए गए। सभी प्रतिमाओं के जयकारे लगाए गए। इस मौके पर भक्तों ने घर परिवार में खुशहाली बनी रहे इस कामना के साथ मूर्ति विसर्जन किया गया। भक्तों ने मां को पुकारा और फिर आना मां की प्रार्थना की।
शाम ढलते-ढलते रांची के सभी पंडाल वीरान और सुनसान हो गए, जो कुछ घंटे पहले तक रंग-बिरंगी रोशनी, मेलों की रौनक, बच्चों की हंसी और लोगों की भीड़ से गुलजार थे। मां की प्रतिमा के विसर्जन के बाद अब वहां बांस, बल्लियों और लकड़ियों का ढांचा ही शेष रह गया। विजयादशमी का यह दिन केवल एक पर्व के समापन का प्रतीक नहीं, बल्कि इस अटूट विश्वास की नई शुरुआत भी है कि मां दुर्गा अगले साल फिर लौटेंगी और भक्तों के आंगन को रोशन करेंगी।
पूजा समितियों के जरिये इस बार छोटे-बड़े कुल 176 पंडाल बनाए गए थे। इन सभी पूजा पंडालों में मां दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमाओं को पूजा पंडालों में स्थापित किए गए थे। प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए सभी समितियों के लिए अलग-अलग तालाब चिन्हित की गई थी। नगर निगम की ओर से चिन्हित तालाबों में करीब 1000 मिट्टी से बने प्रतिमाओं को विधि विधान से तालाबों में विसर्जन की गई।
मां दुर्गा की विदाई पर मंदिरों में हुआ सिंदूर खेला, महिलाओं ने एक-दूसरे को लगाया सिंदूर
मां दुर्गा की विदाई के अवसर पर बुधवार को राजधानी के प्रमुख मंदिरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ महिलाओं की ओर से सिंदूर खेला का आयोजित हुआ। इस दौरान बंगाली परंपरा के अनुसार, महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। इस मौके पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के बीच पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
मेन रोड स्थित दुर्गा बाड़ी में सिंदूर खेला कार्यक्रम में हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया। यहां महिलाओं ने पहले मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर उत्सव की परंपरा निभाई। श्रद्धालुओं में मां के प्रति गहरी आस्था और विदाई का भाव देखने को मिला। महिलाओं ने मां से सभी श्रद्धालुओं पर कृपा बनाए रखने और अगले वर्ष फिर आगमन की प्रार्थना की।
मेन रोड स्थित दुर्गा बाड़ी, हरिमती मंदिर, कांटाटोली के अलावा नेताजी क्लब स्थित मंदिर, हिनू दुर्गा पूजा समिति, देशप्रिय क्लब और हिंदपीढ़ी के बैशाखी संघ में सिंदूर खेला का आयोजन किया गया। सभी स्थानों पर बंगाली परंपराओं के अनुसार, महिलाओं ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। मां दुर्गा की विदाई के साथ ही श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर से मां के आगमन की कामना की।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

