दुलाल भुईयां ने प्रधानमंत्री से दशरथ मांझी को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की

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दुलाल भुईयां ने प्रधानमंत्री से दशरथ मांझी को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की


दुलाल भुईयां ने प्रधानमंत्री से दशरथ मांझी को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की


जमशेदपुर,19 अगस्त (हि.स.)। अखिल भारतीय भुईयां समाज कल्याण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं झारखंड के पूर्व मंत्री दुलाल भुईयां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दशरथ मांझी को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है।

इस संबंध में उन्होंने 18 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री के नाम पत्र भेजकर दशरथ मांझी के अदम्य साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति, संघर्ष, श्रम और समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें भारत रत्न देने की मांग उठाई है।

दुलाल भुईयां ने कहा कि बिहार के गया जिले के निवासी रहे पर्वत पुरुष दशरथ मांझी ने बेहद कठिन परिस्थितियों और अभावों के बीच अकेले पहाड़ काटकर रास्ता बनाने जैसा असाधारण कार्य किया था। उनका जीवन संघर्ष, संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति का ऐसा उदाहरण है, जो आज भी देश के करोड़ों गरीब, वंचित और मेहनतकश लोगों को प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी ने अपने कार्य से यह साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत के बल पर असंभव दिखाई देने वाले कार्य को भी संभव बनाया जा सकता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि भुईयां मुशहर समाज से आने वाले दशरथ मांझी का योगदान किसी एक समाज या क्षेत्र तक सीमित नहीं था। उनका संघर्ष और मानव सेवा की भावना पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। ऐसे में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना उनके योगदान के प्रति राष्ट्र की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

दुलाल भुईयां ने केंद्र सरकार से भुईयां समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का समुचित अध्ययन कराने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले भुईयां समाज के लोगों की परिस्थितियों को देखते हुए उनके विकास, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक उत्थान के लिए विशेष योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता है। साथ ही समाज को उसके उचित संवैधानिक और सामाजिक अधिकार दिलाने की दिशा में भी केंद्र सरकार आवश्यक पहल करे। उन्होंने प्रधानमंत्री से दशरथ मांझी को भारत रत्न देने की मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक

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