झारखंड को 'माइंस' से 'माइंड्स' की ओर ले जाना हमारा संकल्प, राज्य में नीति नहीं, संभावनाओं के खुल रहे द्वार : मुख्यमंत्री

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झारखंड को 'माइंस' से 'माइंड्स' की ओर ले जाना हमारा संकल्प, राज्य में नीति नहीं, संभावनाओं के खुल रहे द्वार : मुख्यमंत्री


झारखंड को 'माइंस' से 'माइंड्स' की ओर ले जाना हमारा संकल्प, राज्य में नीति नहीं, संभावनाओं के खुल रहे द्वार : मुख्यमंत्री


रांची, 09 जुलाई (हि.स.)। नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए राज्य में नवाचार एवं शोध के संस्थानों का स्वागत है। राज्य के समग्र विकास के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर समग्र रूप से कार्य करते हुए नई तकनीकी नवाचार के बल पर राज्य को रिसर्च एवं इनोवेशन के हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य के साथ झारखंड को सतत प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ना है। मुख्यमंत्री गुरुवार को नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत, तकनीकी विशेषज्ञों, निवेशकों, टूरिज्म पार्टनर्स और नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए झारखंड के समग्र और दीर्घकालिक विकास का एक नया विजन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान झारखंड सरकार की ओर से डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख औद्योगिक घरानों और वैश्विक संस्थाओं (जैसे—जिंदल ग्रुप, वरुण बेवरेजेस, टाटा समूह, गूगल, ईज माय ट्रिप, जनरल स्टील, पावर न्यूक्लियर आदि) के साथ कुल चौदह (14)महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए तथा कई विभागों की ड्राफ्ट नीतियों पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक रूप से झारखंड की पहचान खनिज संपदा से रही है, लेकिन अब वक्त आ गया है कि राज्य अपनी बौद्धिक क्षमता और तकनीकी नवाचार के बल पर आगे बढ़े। राज्य को रिसर्च, इनोवेशन और नए आइडियाज का केंद्र बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

समझौता नहीं, यह उपलब्धि है

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न संस्थाओं के साथ किए गए एमओयू सिर्फ कागजी समझौते नहीं, बल्कि राज्य के उज्ज्वल भविष्य की उपलब्धियां हैं। ये नीतियां नहीं, बल्कि झारखंड के विकास की नई संभावनाएं हैं।

राज्य के समग्र विकास के लिए सरकार शॉर्ट-टर्म योजनाओं के बजाय 'लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप' पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि सभी योजनाओं को एक निश्चित समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए।

आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ना

मुख्यमंत्री ने जियाडा के नियमों में आदिवासी समूह के लिए 25 प्रतिशत रियायत के प्रावधान का उल्लेख करते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस बात पर पुनर्विचार किया जाए कि इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कैसे किया जा सकता है, ताकि राज्य की आत्मा यानी हमारे आदिवासी समाज को विकास के मुख्य रास्ते से जोड़ा जा सके।

उन्होंने स्वीकार किया कि अतीत में बेहतर कम्युनिकेशन की कमी के कारण झारखंड की क्षमताएं दुनिया के सामने पूरी तरह नहीं आ पाईं। सरकार अब इस गैप को खत्म कर देश-विदेश के निवेशकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेगी।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों, केंद्रीय मंत्रियों, तकनीकी विशेषज्ञों और निवेशकों का आभार व्यक्त किया और झारखंड के विकास में सहभागी बनने का आमंत्रण दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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