श्रद्धा और उल्लास के साथ स्वर्णरेखा घाट में मां बाघेश्वरी की प्रतिमा विसर्जित, सिंदूर खेला में झूमीं महिलाएं

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श्रद्धा और उल्लास के साथ स्वर्णरेखा घाट में मां बाघेश्वरी की प्रतिमा विसर्जित, सिंदूर खेला में झूमीं महिलाएं


श्रद्धा और उल्लास के साथ स्वर्णरेखा घाट में मां बाघेश्वरी की प्रतिमा विसर्जित, सिंदूर खेला में झूमीं महिलाएं


श्रद्धा और उल्लास के साथ स्वर्णरेखा घाट में मां बाघेश्वरी की प्रतिमा विसर्जित, सिंदूर खेला में झूमीं महिलाएं


जमशेदपुर,03 मई (हि.स.)। शहर में सुवर्ण बनिक समाज,प्रदेश,जिला एवं विभिन्न शाखा समितियों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मां बाघेश्वरी देवी की तीन दिवसीय वार्षिक पूजा का समापन रविवार को विधि-विधान के साथ हुआ। बाराद्वारी स्थित समाज भवन में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान का अंतिम दिन विशेष रूप से भावनात्मक और उत्साहपूर्ण रहा,जब श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा का विसर्जन किया।

विसर्जन से पूर्व समाज की महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मां के चरणों में श्रद्धा अर्पित कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर 'सिंदूर खेला' की परंपरा निभाई,जिससे पूरे परिसर में उत्सव और उमंग का माहौल बन गया।

इसके पश्चात समाज के लोग जुलूस के रूप में स्वर्णरेखा नदी घाट पहुंचे। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच 'आसछे बोछोर आबार होबे' के उद्घोष के साथ मां बाघेश्वरी देवी की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद रही और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

कार्यक्रम में केंद्रीय अध्यक्ष विश्वनाथ चंद्रा के नेतृत्व में समाज के कई प्रमुख सदस्य शामिल हुए। इनमें निताई दत्ता,संजय पोद्दार,धनंजय चंद्रा,समीर दत्ता, विजय चंद्रा,शंकर चंद्र,संजय दत्ता,सनोज चंद्र,शिशिर दत्ता,दुर्गा दत्ता,राजेश दत्ता,गणेश कोवाल और बिमल चंद्र सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक

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