होली पूर्णिमा पर राँजड़ी में गूँजी आध्यात्मिक वाणी, सद्गुरु साहिब जी ने भक्ति, नाम-सुमिरन और त्रिगुणों के रहस्य पर किया विस्तृत प्रकाश

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होली पूर्णिमा पर राँजड़ी में गूँजी आध्यात्मिक वाणी, सद्गुरु साहिब जी ने भक्ति, नाम-सुमिरन और त्रिगुणों के रहस्य पर किया विस्तृत प्रकाश


जम्मू, 03 मार्च (हि.स.)। राँजड़ी, जम्मू में होली पूर्णिमा के पावन अवसर पर साहिब बंदगी के सद्गुरु साहिब जी ने अपने प्रवचनों की अमृत वर्षा से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस भक्ति मार्ग की आज चर्चा होती है, उसके मूल प्रवर्तक कबीर साहिब हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि रामायण अवधी भाषा में रचित है, परंतु कबीर साहिब की वाणी सर्वकालिक और सार्वभौमिक है, जो आज भी विश्वभर में गूँज रही है।

सद्गुरु साहिब जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि महात्मा गाँधी से लेकर नेल्सन मंडेला तक ने कबीर की विचारधारा को आत्मसात किया। उन्होंने बताया कि कबीर साहिब ने तप, योग, हठयोग और यज्ञ से आगे बढ़कर भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। अपने प्रवचन में उन्होंने सत, रज और तम—इन तीन गुणों को माया का स्वरूप बताते हुए कहा कि मनुष्य का व्यवहार इन गुणों के प्रभाव से बदलता रहता है। तमोगुण आने पर बुद्धि भ्रष्ट होती है, रजोगुण में मनुष्य धन और भौतिक इच्छाओं में उलझ जाता है जबकि सतोगुण में कुछ समय के लिए सात्विकता आती है।

सद्गुरु साहिब जी ने कहा कि पाप और पुण्य दोनों ही बंधन हैं। निष्काम भाव से कर्म और निरंतर नाम-सुमिरन ही आत्मा को मन और माया के जाल से मुक्त कर सत्य में स्थापित कर सकता है। प्रवचन के अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को नाम-स्मरण को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

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