वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और पार्किंग डल झील की नाज़ुक पारिस्थितिकी को खतरे में डाल सकती है-मंज़ूर वांग्नू

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श्रीनगर, 31 जुलाई (हि.स.)। जाने-माने पर्यावरणविद और निगीन झील संरक्षण संगठन (एनएलसीओ) के अध्यक्ष मंज़ूर वांग्नू ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वे निशात-सठू सड़क या इसके निरंतर उपयोग के विरोध में नहीं हैं लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और पार्किंग डल झील की नाज़ुक पारिस्थितिकी को खतरे में डाल सकती है।

जारी एक बयान में वांग्नू ने कहा कि मीर बेहरी और आसपास के इलाकों के निवासियों को सुगमता, सम्मान और बुनियादी नागरिक सुविधाओं का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि मीर बेहरी और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सुगमता, सम्मान और अन्य नागरिकों को उपलब्ध सभी बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए। इन इलाकों में लगभग 40,000 लोग रहते हैं जिनमें कई आर्थिक रूप से कमजोर परिवार शामिल हैं। उनके बच्चों को शिक्षा, खेल के मैदान और अवसर मिलने चाहिए जबकि उनके परिवारों को बेहतर संपर्क और आजीविका मिलनी चाहिए।

हालांकि वांग्नू ने चेतावनी दी कि यह सड़क डल झील के परिदृश्य के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हिस्से से होकर गुजरती है और इसे अपना मूल स्वरूप बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मेरी चिंता हमेशा से यही रही है कि मौजूदा सड़क धीरे-धीरे भारी वाहनों, ट्रकों, अनियंत्रित यातायात या सड़क किनारे पार्किंग का अड्डा न बन जाए। स्थानीय लोगों की आवाजाही जारी रहनी चाहिए साथ ही पैदल मार्ग और साइकिल ट्रैक का स्वरूप भी संरक्षित रहना चाहिए।

सड़क के खुले रहने के आश्वासन का स्वागत करते हुए वांग्नू ने कहा कि इसके निरंतर उपयोग के साथ-साथ उचित नियमन भी होना चाहिए जिसमें भारी वाहनों, ट्रकों और अनियंत्रित पार्किंग पर प्रतिबंध शामिल हैं ताकि डल झील पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

उन्होंने कहा कि उनका रुख कभी भी स्थानीय निवासियों के विकास के खिलाफ नहीं रहा है बल्कि उन्होंने झील के संरक्षण के साथ-साथ आजीविका उत्पन्न करने के साधन के रूप में जिम्मेदार, पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन का समर्थन किया है। यह लोगों और पर्यावरण के बीच टकराव का मुद्दा नहीं बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसका समाधान दोनों की रक्षा में निहित है। डल झील की रक्षा को साझा जिम्मेदारी बताते हुए वांग्नू ने दोहराया कि उद्देश्य हमेशा से संरक्षण रहा है न कि टकराव। एनएलसीओ ने कश्मीर के जल निकायों के दीर्घकालिक संरक्षण और जीर्णोद्धार को सुनिश्चित करने के लिए सरकारी एजेंसियों, स्थानीय समुदायों और नागरिक समाज के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

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