पीओजेके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन
जम्मू, 01 अगस्त (हि.स.)। भाजपा के पूर्व एमएलसी एवं जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता गिरधारी लाल रैना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। स्थानीय संगठनों द्वारा स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।
रैना ने कहा कि हालिया घटनाक्रम पाकिस्तान की नीतियों के अंतर्विरोधों को भी उजागर करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं के हालिया बयानों से स्पष्ट है कि जिन उग्रवादी संगठनों को कभी संरक्षण दिया गया वही अब उसके लिए चुनौती बन रहे हैं जो आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में अपनाने के दुष्परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति की जड़ें 1 अगस्त 1947 की घटनाओं से जुड़ी हैं जब ब्रिटिश सरकार ने गिलगित एजेंसी का प्रशासन तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत को सौंपा था। रैना ने दावा किया कि बाद में गिलगित स्काउट्स के कमांडर मेजर विलियम ब्राउन ने 'ऑपरेशन दत्ता' के तहत विद्रोह कर क्षेत्र को पाकिस्तान के नियंत्रण में पहुंचाने में भूमिका निभाई।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सरकारें दशकों से पीओजेके और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों की लोकतांत्रिक, राजनीतिक और विकास संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रही हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है जबकि स्थानीय लोग मूलभूत सुविधाओं और विकास से वंचित हैं। रैना ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि इन क्षेत्रों का उल्लेख करते समय सही नामावली का प्रयोग किया जाए तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

