जम्मू-कश्मीर में श्रद्धा और उत्साह से मनाई गई महामहेश्वर अभिनवगुप्त जयंती

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जम्मू-कश्मीर में श्रद्धा और उत्साह से मनाई गई महामहेश्वर अभिनवगुप्त जयंती


जम्मू, 25 जून (हि.स.)। कश्मीर शैव दर्शन के महान आचार्य, दार्शनिक और आध्यात्मिक चिंतक महामहेश्वर अभिनवगुप्त की जयंती जम्मू-कश्मीर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन कर उनके जीवन और योगदान को याद किया गया। जयंती समारोह की शुरुआत जम्मू के नसीब नगर, जानीपुर स्थित राम शैव (त्रिक) आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना से हुई जिसमें श्रद्धालुओं, विद्वानों और अनुयायियों ने भाग लिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने अभिनवगुप्त को कश्मीर शैव दर्शन का महान प्रकाश स्तंभ बताते हुए कहा कि उनके दर्शन, आध्यात्मिकता, साहित्य और सौंदर्यशास्त्र पर आधारित विचार आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

श्रीनगर के ऐतिहासिक आनंदेश्वर भैरव मंदिर, मैसूमा में भी विशेष प्रार्थना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। इस दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी पूजा-अर्चना में भाग लेकर कश्मीर की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। जोनराजा इंस्टीट्यूट ऑफ जेनोसाइड एंड एट्रोसिटीज स्टडीज की अभिनवगुप्त चेयर द्वारा बीरवाह तक एक विरासत एवं आध्यात्मिक यात्रा का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि यह यात्रा कश्मीर की दार्शनिक परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है।

अभिनवगुप्त चेयर के प्रमुख सुनील रैना राजानाका ने कहा कि अभिनवगुप्त केवल कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरी मानवता की साझा बौद्धिक विरासत हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान देश-विदेश के विश्वविद्यालयों में व्याख्यान, पॉडकास्ट और शोध गतिविधियों के माध्यम से उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

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