योग भारत की विश्व को अमूल्य देन, वैश्विक स्तर पर बढ़ी स्वीकार्यता: नटरंग

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योग भारत की विश्व को अमूल्य देन, वैश्विक स्तर पर बढ़ी स्वीकार्यता: नटरंग


जम्मू, 20 जून (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में नटरंग ने अपने स्टूडियो थिएटर में एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें प्रख्यात रंगकर्मी एवं सांस्कृतिक राजदूत बलवंत ठाकुर ने योग के वैश्विक प्रसार और उससे जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में योग प्रेमियों, विद्यार्थियों, कलाकारों तथा सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अपने संबोधन में बलवंत ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया जाना भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की ऐतिहासिक उपलब्धि थी। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में सेवाएं देते हुए तथा दक्षिण अफ्रीका और मॉरीशस में सांस्कृतिक राजनयिक के रूप में कार्यकाल के दौरान उन्होंने योग को विभिन्न समुदायों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने योग को भारत की सॉफ्ट पावर का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि यह भाषा, धर्म और भौगोलिक सीमाओं से परे मानवता को स्वास्थ्य, शांति और संतुलन का संदेश देता है।

ठाकुर ने कोविड-19 महामारी के दौरान योग की बढ़ती उपयोगिता का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन समय में करोड़ों लोगों ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग को अपनाया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग स्थित वांडरर्स स्टेडियम और मॉरीशस के ऐतिहासिक अप्रवासी घाट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोहों के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि आज योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है जिसने न केवल करोड़ों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है बल्कि विश्व मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी और मजबूत किया है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने योग के माध्यम से मानव कल्याण में भारत के योगदान की सराहना की।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

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