यज्ञ केवल आहुति नहीं, सेवा और सद्कर्मों का समन्वय-स्वामी राम स्वरूप

WhatsApp Channel Join Now
यज्ञ केवल आहुति नहीं, सेवा और सद्कर्मों का समन्वय-स्वामी राम स्वरूप


कठुआ, 16 अप्रैल (हि.स.)। वेद मंदिर योल कैंप में 12 अप्रैल से आरंभ हुए 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के दौरान स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को यज्ञ की वास्तविक महिमा और महत्व समझाया। वेद मंत्रों की आहुतियों के साथ उनकी व्याख्या करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यज्ञ का अर्थ केवल अग्नि में आहुति डालना नहीं है बल्कि यह तीन महान शुभ कर्मों देवपूजा, संगतिकरण और दानकृका समन्वय है।

स्वामीजी ने कहा कि वेदों के अनुसार यज्ञ तभी पूर्ण माना जाता है जब उसमें देवपूजा के अंतर्गत माता-पिता, अतिथि, आचार्य और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सेवा शामिल हो। केवल अग्नि में आहुतियां डालने से पुण्य की प्राप्ति नहीं होती बल्कि सेवा और सद्कर्मों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने सामवेद और ऋग्वेद के मंत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि यज्ञ में आहुति वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ ही दी जानी चाहिए। वर्तमान समय में वेद ज्ञान से दूर होते हुए कई स्थानों पर यज्ञ की परंपरा को गलत रूप में अपनाया जा रहा है जो वेदों के सिद्धांतों के विपरीत है। स्वामी राम स्वरूप ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि भारत की प्राचीन संस्कृति और वेदों की शिक्षाओं की ओर पुनः लौटना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से ही समाज में सुख, शांति और भाईचारे जैसे सद्गुणों का विकास संभव है। यज्ञानुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं और वेदों के ज्ञान को आत्मसात कर जीवन में अपनाने का संकल्प ले रहे हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

Share this story