अन्न दान से कभी क्षीण नहीं होता धन-स्वामी राम स्वरूप जी का वेद मन्दिर योल में प्रवचन

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अन्न दान से कभी क्षीण नहीं होता धन-स्वामी राम स्वरूप जी का वेद मन्दिर योल में प्रवचन


कठुआ, 19 मई (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 38वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को ऋग्वेद के गूढ़ उपदेशों से अवगत कराया। उन्होंने ऋग्वेद मन्त्र 10/117/1 का उल्लेख करते हुए बताया कि केवल अन्न के अभाव में ही मृत्यु नहीं होती बल्कि भरे पेट वाले व्यक्ति को भी मृत्यु प्राप्त होती है।

स्वामी जी ने कहा कि परमेश्वर इस मन्त्र के माध्यम से अन्न दान का गहरा रहस्य समझाते हैं। जो व्यक्ति किसी भूखे को भोजन कराता है, उसका अन्न और धन कभी कम नहीं होता। इसके विपरीत जो व्यक्ति स्वयं अकेले भोजन करता है और दूसरों को तृप्त नहीं करता, वह परमात्मा की कृपा से वंचित रह जाता है। उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति भोजन की तलाश में हो और उसे कोई भूखा या अन्न के अभाव में कमजोर व्यक्ति मिल जाए तो उसे भोजन कराना ही सच्चा पुण्य है। यह ईश्वर का सीधा उपदेश है। मन्त्र 6 का उल्लेख करते हुए स्वामी राम स्वरूप जी ने बताया कि जो विवेकहीन मनुष्य धन और अन्न पाकर केवल अपने लिए ही उपयोग करते हैं, वे पाप के भागी बनते हैं। ऐसा धन ही अंततः उनके लिए विनाश का कारण बनता है क्योंकि वे न तो विद्वानों का पालन करते हैं और न ही अपने परिवार का उचित पोषण। अंत में उन्होंने कहा कि वेदों में दान की महिमा विशेष रूप से वर्णित है परंतु दान सदैव योग्य और अधिकारी व्यक्ति को ही देना चाहिए तभी उसका वास्तविक फल प्राप्त होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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