“माता समान पृथिवी के हम रक्षक”-वेद मन्दिर योल में यज्ञानुष्ठान के दौरान स्वामी राम स्वरूप का संदेश

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“माता समान पृथिवी के हम रक्षक”-वेद मन्दिर योल में यज्ञानुष्ठान के दौरान स्वामी राम स्वरूप का संदेश


कठुआ, 01 मई (हि.स.)।योल स्थित वेद मन्दिर में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने अथर्ववेद के माध्यम से पृथिवी और मानव कर्तव्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला।

स्वामी राम स्वरूप जी ने अथर्ववेद काण्ड 12 सूक्त 1 का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य कर्म, सत्य ज्ञान, दीक्षा, तप और यज्ञ (देवपूजा, संगतिकरण, दान) जैसे वैदिक आचरण ही पृथिवी को धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य इन वैदिक सिद्धांतों का पालन नहीं करेगा तो पृथिवी पर संकट गहराता जाएगा। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व पहले ही दो विश्व युद्ध देख चुका है और तीसरे विश्व युद्ध की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में मानवता को अज्ञान और दुःख से बचाने के लिए वेदों के ज्ञान को अपनाना आवश्यक है। स्वामी जी ने कहा कि पृथिवी हमें अन्न, जल, धन और जीवन के लिए आवश्यक सभी संसाधन प्रदान करती है, इसलिए हमें “भूमिः माता अहम् पृथिव्याः पुत्रः” के भाव को अपनाते हुए पृथिवी को माता मानकर उसकी सेवा और रक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में जब देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है, तब सेना, वायुसेना और नौसेना को सशक्त बनाना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को देश की रक्षा के लिए सेना में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित करें। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति और त्याग की भावना को भी रेखांकित किया गया। स्वामी जी ने कहा कि जो वीर अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीते हैं, वही सच्चे अर्थों में शूरवीर कहलाते हैं। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने वेदों के ज्ञान को जीवन में अपनाने और राष्ट्र व पृथिवी की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने का संकल्प लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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