वहीद पारा ने आरक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और नीति को तर्कसंगत बनाने की मांग की
श्रीनगर, 21 सितंबर(हि.स.)। पीडीपी नेता और पुलवामा से विधायक वहीद-उर-रहमान पारा ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर सरकार से आरक्षण नीति पर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करने और इस व्यवस्था को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस नीति से ओपन-मेरिट वाले उम्मीदवार प्रभावित हो रहे हैं और सरकार में कश्मीरियों के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंताएं पैदा हो रही हैं।
विधानसभा सत्र के दौरान पारा ने कहा कि सरकार ने छह महीने का समय मांगा था। लगभग दो साल बीत चुके हैं लेकिन सरकार ने अभी तक आरक्षण नीति पर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि मुख्यमंत्री, सरकार और कैबिनेट खुलकर सामने आएं और रिपोर्ट को सार्वजनिक करें। हमें बताएं कि आपने क्या सिफारिशें भेजी हैं। पारा ने आरक्षण को जनसंख्या के अनुपात के अनुरूप करने की मांग की और कहा कि ओपन-मेरिट वाले उम्मीदवारों को उनका उचित हिस्सा मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारी दूसरी मांग है कि आरक्षण आबादी के अनुपात में होना चाहिए। आबादी के हिसाब से आरक्षण दें। इसे आनुपातिक आधार पर लागू करें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस नीति के कारण कश्मीरी बोलने वाले लोग सिस्टम से बाहर हो रहे हैं। पारा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों खासकर कश्मीर के लोगों में यह चिंता है कि यह पूरी नीति कश्मीरी बोलने वाले लोगों को सिस्टम से बाहर करने के लिए बनाई जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया भले ही हम आबादी का 70% हैं लेकिन मेरिट और आरक्षण के नाम पर आप कश्मीरियों को सिस्टम से बाहर कर रहे हैं। पारा ने कहा कि कश्मीरी प्रतिनिधित्व का मुद्दा ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र के राजनीतिक आंदोलन से जुड़ा रहा है और उन्होंने कश्मीर कश्मीरियों के लिए नारे का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारा कहना है कि सरकार को आरक्षण के मुद्दे को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सरकार को वह रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए और आरक्षण को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता

